महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने रविवार को केदारनाथ धाम की वर्ष 1882 की एक दुर्लभ तस्वीर साझा कर केदारनाथ यात्रा के पुराने स्वरूप को याद किया है।
उन्होंने कहा कि उस दौर में न सड़कें थीं, न रेल मार्ग और न ही हेलीकॉप्टर सेवा। तब यह यात्रा समय, धैर्य और अटूट आस्था की परीक्षा होती थी।
आनंद महिंद्रा ने अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वर्ष 1882 की यह तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह संभवतः केदारनाथ मंदिर की शुरुआती ज्ञात तस्वीरों में से एक है
उन्होंने कहा कि इस तस्वीर से नजरें हटाना मुश्किल है, क्योंकि यह उस दौर की कठिन तीर्थयात्रा की झलक दिखाती है, जब श्रद्धालुओं के पास सुविधाएं नहीं, केवल आस्था का सहारा था।
उन्होंने कहा कि उस समय यात्रा सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का माध्यम नहीं थी, बल्कि वही तीर्थयात्रा का असली स्वरूप थी। हर कदम श्रद्धा, धैर्य और तपस्या का प्रतीक होता था।
महिंद्रा ने माना कि आज बेहतर सड़क, परिवहन और हेलीकॉप्टर सेवाओं से यात्रा आसान हो गई है और यह सकारात्मक बदलाव है, क्योंकि इससे अधिक लोगों को बाबा केदार के दर्शन का अवसर मिल रहा है।

