महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन बिल को लोकसभा में बड़ा झटका लगा है। सदन में हुए मत विभाजन में बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जबकि इस बिल को पारित कराने के लिए 352 वोट यानी दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। इस तरह सरकार आवश्यक संख्या से 54 वोट पीछे रह गई और बिल विचार के स्तर पर ही गिर गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा करते हुए कहा कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण आगे की कार्यवाही संभव नहीं है।

यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले 11 वर्षों में यह पहला मौका है जब केंद्र की मोदी सरकार संसद में कोई महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं करा सकी। इस बिल पर लोकसभा में करीब 21 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें 130 सांसदों ने अपने विचार रखे। इनमें 56 महिला सांसद भी शामिल थीं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, हमने संविधान पर हुए इस हमले को हरा दिया है। हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
अमित शाह का विपक्ष पर हमला, ‘महिलाएं देख रही हैं’
बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने केवल सरकार का विरोध करने के लिए इस विधेयक को गिराया, जबकि चर्चा के दौरान सभी दलों ने महिला आरक्षण के समर्थन की बात कही थी। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन जानबूझकर इस बिल को पास नहीं होने देना चाहते, ताकि 2029 से पहले महिला आरक्षण लागू न हो सके।
उन्होंने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना और जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2023 में यह बिल सर्वसम्मति से पारित हुआ था, लेकिन अब विपक्ष इससे पीछे हट रहा है।
राहुल गांधी का पलटवार, सदन में हंगामा
वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल राजनीतिक उद्देश्य से लाया गया है और सरकार खुद इसे पारित कराने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के जरिए चुनावी समीकरण बदलना चाहती है।
उनके भाषण के दौरान कुछ तीखे बयान पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष ने इसे प्रधानमंत्री और देश की जनता का अपमान बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान की निंदा करते हुए माफी की मांग की।
अन्य विधेयकों पर भी लगी रोक
मतदान के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि इससे जुड़े अन्य दो विधेयकों को भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही महिला आरक्षण से जुड़े संशोधनों पर फिलहाल विराम लग गया है।
यह मामला अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है, जहां सत्ता पक्ष विपक्ष पर महिला हितों के खिलाफ खड़े होने का आरोप लगा रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है।

