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October 12, 2026
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संविधान संशोधन बिल गिरने पर सियासी घमासान, अमित शाह बोले– 2029 में महिलाओं का आक्रोश झेलेगा विपक्ष

लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट किया, जिसके चलते बिल पास नहीं हो पाया। इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।

अमित शाह का विपक्ष पर हमला

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन को कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया।

बिल को गिराना निंदनीय: शाह

उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले इस बिल को गिराना निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका राजनीतिक असर दूर तक जाएगा और विपक्ष को 2029 के लोकसभा चुनाव सहित हर चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

नड्डा ने बताया ‘काला अध्याय’

जेपी नड्डा ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिल का पारित न होना लोकतंत्र के लिए “काला अध्याय” है। उन्होंने विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया और कहा कि इससे करोड़ों महिलाओं के सपनों को झटका लगा है।

महिला सशक्तीकरण पर टकराव

नड्डा ने कहा कि जहां एक ओर सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं विपक्ष की सोच उनकी प्रगति में बाधा बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नारी शक्ति का यह आक्रोश आने वाले चुनावों में दिखाई देगा।

मांझी का भी तीखा बयान

जीतन राम मांझी ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बिल का गिरना नहीं, बल्कि देश की बेटियों के सपनों और उम्मीदों को तोड़ने जैसा है। उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया।

सियासी घमासान तेज

संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्तापक्ष जहां इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर विपक्ष को घेर रहा है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर अपने तर्क दे रहा है

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