Uttarakhand DIPR
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November 2, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी आज करेंगे देवभूमि परिवार पोर्टल का शुभारंभ, 15 साल से उत्तराखंड में रह रहे परिवारों को मिलेगी विशिष्ट पहचान




उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और पात्रता के सत्यापन की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में धामी सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज देवभूमि परिवार पोर्टल का शुभारंभ करेंगे। इस व्यवस्था के तहत प्रदेश में 15 साल या उससे अधिक समय से निवास कर रहे परिवारों को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी जारी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के पात्र परिवारों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया जा सके। देवभूमि परिवार आईडी के माध्यम से एक ही परिवार के सभी सदस्यों का विवरण एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध रहेगा। इसमें परिवार के सदस्यों के नाम, आयु, आधार संख्या, सामाजिक और आर्थिक स्थिति, शैक्षिक योग्यता तथा रोजगार से जुड़ी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इससे सरकार के पास परिवारों से संबंधित एक व्यवस्थित आंकड़ा उपलब्ध होगा। अलग-अलग विभागों में एक ही जानकारी बार-बार देने और दस्तावेज जमा कराने की जरूरत भी कम होगी।

परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला होगी मुखिया

इस व्यवस्था की एक खास बात परिवार के मुखिया के चयन को लेकर है। देवभूमि परिवार आईडी में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे वरिष्ठ महिला को परिवार का मुखिया माना जाएगा। यानी परिवार की डिजिटल पहचान महिला मुखिया के नाम से दर्ज होगी। सरकार की इस पहल को परिवार आधारित सरकारी योजनाओं में महिलाओं की भूमिका और भागीदारी को महत्व देने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। अभी तक प्रदेश में विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अलग-अलग विभागों में दस्तावेज जमा कराने पड़ते हैं। कई बार एक ही प्रमाणपत्र और व्यक्तिगत जानकारी के सत्यापन की प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। इससे आम लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और विभागों का समय भी खर्च होता है। देवभूमि परिवार पोर्टल शुरू होने के बाद एकीकृत आंकड़ों के आधार पर परिवार की पात्रता का सत्यापन किया जा सकेगा। इससे योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि परिवार आधारित इस डिजिटल व्यवस्था से पात्र लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली अनियमितताओं को रोकने और सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में भी सहायता मिलेगी। विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान होने से योजनाओं की निगरानी और उनके प्रभाव का आकलन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।


डेटा से छेड़छाड़ पर 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये जुर्माना


देवभूमि परिवार पोर्टल पर दर्ज होने वाली व्यक्तिगत जानकारियों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। केंद्रीयकृत डिजिटल डेटाबेस में सेंधमारी करने, अनधिकृत तरीके से जानकारी हासिल करने या आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसका उद्देश्य परिवारों की निजी जानकारियों को सुरक्षित रखना और डिजिटल व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकना है। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में देवभूमि परिवार प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। यह प्राधिकरण पोर्टल के संचालन, आंकड़ों के प्रबंधन और संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा। धामी सरकार की इस पहल को उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में देवभूमि परिवार आईडी प्रदेश के परिवारों और सरकारी विभागों के बीच एक साझा डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और बार-बार दस्तावेजी औपचारिकताओं से भी राहत मिलेगी।

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