उत्तराखंड तेजी से देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। चारधाम यात्रा के साथ-साथ राज्य के प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या पहुंची है। कई प्रमुख धामों में दर्शनार्थियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में डेढ़ से ढाई गुना तक बढ़ गई है, जो राज्य में धार्मिक पर्यटन के तेजी से विस्तार का संकेत है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य के प्राचीन मंदिरों का विकास, तीर्थस्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और बेहतर सड़क एवं परिवहन नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सके।
सरकार मानसखंड मंदिरमाला मिशन के तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों के विकास, पर्यटन सर्किट के विस्तार और धार्मिक स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। इन प्रयासों का असर अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के रूप में साफ दिखाई दे रहा है।
चारधाम यात्रा ने इस वर्ष नया रिकॉर्ड बनाया है। यात्रा के 105 दिनों में 45.84 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। वहीं, पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून 2026 के बीच अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम में 1.74 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या करीब 68 हजार थी।
चंपावत के पूर्णागिरि धाम में इस वर्ष जून तक 20.91 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग डेढ़ गुना अधिक है। श्रीनगर स्थित धारी देवी मंदिर में भी दर्शनार्थियों की संख्या बढ़कर 5.42 लाख से अधिक हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 2.83 लाख था।
रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वर्ष पहली छमाही में यहां 3.40 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 1.36 लाख थी।
टिहरी जिले के मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र भी पर्यटकों और आध्यात्मिक यात्रियों के प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। जनवरी से जून 2026 के बीच यहां लगभग 16 लाख पर्यटक पहुंचे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक हैं। कार्तिक स्वामी और सुरकंडा देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
कठिन यात्रा मार्ग के बावजूद यमुनोत्री धाम ने इस वर्ष नया इतिहास रच दिया है। 2 अगस्त तक 6.54 लाख से अधिक श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
बद्रीनाथ धाम ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। यात्रा के पहले 100 दिनों में 15.52 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.11 लाख अधिक हैं।
पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के केवल दो महीनों में 52,441 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है।
नैनीताल जिले का प्रसिद्ध कैंची धाम भी इस वर्ष श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना रहा। जनवरी से जून 2026 के बीच यहां 24.34 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे। अकेले जून महीने में ही करीब 8.66 लाख श्रद्धालुओं ने धाम में माथा टेका, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा माना जा रहा है।
लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या यह संकेत दे रही है कि उत्तराखंड धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

