हिमालय में गूंजा आस्था का स्वर: वैदिक मंत्रों के बीच खुले केदारनाथ धाम के कपाट, भक्तों की उमड़ी आस्था - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
May 15, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

हिमालय में गूंजा आस्था का स्वर: वैदिक मंत्रों के बीच खुले केदारनाथ धाम के कपाट, भक्तों की उमड़ी आस्था

हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच स्थित केदारनाथ धाम में आज सुबह भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही “हर-हर महादेव” और “जय बाबा केदार” के जयघोष से पूरा धाम गुंजायमान हो उठा और वातावरण पूरी तरह शिवमय बन गया।



इस पावन अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे, जिनकी आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। कठिन पहाड़ी रास्तों और ठंडे मौसम के बावजूद भक्तों का जोश कम नहीं हुआ। कई श्रद्धालु तो देर रात से ही कतारों में लगकर अपने आराध्य के दर्शन का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, भक्तों की आंखों में श्रद्धा और भक्ति की झलक साफ दिखाई दी।



कपाट खुलने के साथ ही गर्भगृह में बाबा केदारनाथ के पंचमुखी स्वयंभू शिवलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती संपन्न की गई। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि ने पूरे केदारघाटी क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। चारों ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच यह दृश्य किसी दिव्य अनुभूति से कम नहीं था।



चारधाम यात्रा के इस महत्वपूर्ण पड़ाव से पहले ही उत्तराखंड में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर खोले जा चुके हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित इन पवित्र स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और देश की सुख-समृद्धि के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की।

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि चारधाम यात्रा भारत की आस्था, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि भारतीय सनातन परंपराओं की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।

कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ घाटी में आस्था का यह महापर्व शुरू हो गया है, जो अगले छह महीनों तक जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, ताकि हर यात्री इस आध्यात्मिक यात्रा को सुरक्षित और सहज तरीके से पूरा कर सके।

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