देशभर में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अन्य अनियमितताओं के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सरकार ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ सोमवार को लोकसभा में पेश कर सकती है। प्रस्तावित संशोधनों के जरिए जांच और सुनवाई की प्रक्रिया में तेजी लाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा पेपर लीक से जुड़े संगठित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने की तैयारी की गई है। इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन संशोधनों को मंजूरी दे दी थी।
सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फेरने का काम किया है। इन घटनाओं से न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हुई, बल्कि युवाओं का भरोसा भी कमजोर हुआ। यही वजह है कि अब ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सात महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों की जांच तय समय-सीमा के भीतर पूरी करना, मामलों की सुनवाई में तेजी लाना, दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना और पूरे तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाना है। सरकार का कहना है कि मजबूत कानूनी व्यवस्था बनने से पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
संशोधन विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को इस कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए किसी भी सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार मिलेगा। इससे ऐसे मामलों का लंबे समय तक लंबित रहना कम होगा और जांच पूरी होने के बाद जल्द सुनवाई कर फैसला सुनाया जा सकेगा।
सरकार जांच एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दे रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने, साक्ष्यों के वैज्ञानिक संग्रह, डिजिटल सबूतों के बेहतर उपयोग और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी भी स्पष्ट करने का प्रस्ताव है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके।
संशोधित कानून में पेपर लीक, प्रश्नपत्रों की चोरी, परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप, अनुचित साधनों के इस्तेमाल और संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर पांच से दस वर्ष तक के कारावास और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान होगा।
यदि अपराध किसी संगठित गिरोह, परीक्षा माफिया या ऐसे नेटवर्क द्वारा किया जाता है, जो आर्थिक लाभ के लिए परीक्षाओं की गोपनीयता भंग करता है, तो उसके खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार का मानना है कि भारी आर्थिक दंड और कठोर सजा से संगठित गिरोहों पर प्रभावी रोक लगेगी।
सरकार के अनुसार इन संशोधनों का उद्देश्य केवल दोषियों को दंडित करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो। परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परीक्षा की गोपनीयता पूरी तरह सुनिश्चित की जा सके।
यदि यह संशोधन विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो देशभर में आयोजित होने वाली केंद्रीय और राज्य स्तरीय सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं के मामलों में पहले से अधिक सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि नए प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, दोषियों में कानून का डर पैदा होगा और करोड़ों अभ्यर्थियों को निष्पक्ष एवं विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
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