देश के करोड़ों ऋणधारकों को राहत: RBI ने रेपो दर 5.25% पर बरकरार रखी, EMI पर नहीं बढ़ेगा बोझ - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
August 5, 2026
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देश के करोड़ों ऋणधारकों को राहत: RBI ने रेपो दर 5.25% पर बरकरार रखी, EMI पर नहीं बढ़ेगा बोझ

देश के करोड़ों गृह, वाहन और अन्य ऋणधारकों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने शुक्रवार को रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद फिलहाल बैंकों की ऋण दरों में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है और आम लोगों की मासिक ऋण किस्तों पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां पिछले कुछ महीनों में अधिक चुनौतीपूर्ण हुई हैं। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन परिस्थितियों का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान की आशंका बनी हुई है। इससे वैश्विक आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है और महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है। हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनी हुई है।

आरबीआई के अनुसार, खुदरा महंगाई दर फिलहाल केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य के दायरे में बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों का असर अभी घरेलू बाजार में सीमित रूप से दिखाई दिया है। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक ने आगाह किया है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो आने वाले महीनों में महंगाई बढ़कर लक्ष्य सीमा के ऊपरी स्तर के करीब पहुंच सकती है।

मौद्रिक नीति समिति ने अपनी नीति का रुख भी ‘तटस्थ’ बनाए रखा है। समिति का मानना है कि महंगाई से जुड़े जोखिम पहले की तुलना में बढ़े हैं और वर्तमान परिस्थितियों में जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के बजाय आर्थिक संकेतकों पर नजर रखना अधिक उचित होगा। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों, महंगाई की स्थिति और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।

आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भी भरोसा जताया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में देश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही। इस वृद्धि में निजी उपभोग, निवेश गतिविधियों, विनिर्माण क्षेत्र और सेवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों से जुड़े हालिया संकेतक इन क्षेत्रों की मजबूती को दर्शाते हैं। कारोबार जगत का भरोसा भी कायम है, जो आने वाले समय में आर्थिक विकास को गति देने में सहायक साबित हो सकता है।

रेपो दर वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। जब रेपो दर में कटौती होती है तो बैंकों के लिए धन जुटाना सस्ता हो जाता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर ऋण दे सकते हैं। वहीं रेपो दर बढ़ने पर ऋण महंगे हो जाते हैं और मासिक किस्तों का बोझ बढ़ सकता है। आरबीआई का यह फैसला आर्थिक विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। फिलहाल रेपो दर को स्थिर रखकर केंद्रीय बैंक ने ऋणधारकों को राहत देने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर सतर्क नजर बनाए रखने का संकेत दिया है।

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