VB-G RAM G BILL ‘जी-राम-जी’ बिल पर विपक्ष आग-बबूला - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
May 10, 2026
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VB-G RAM G BILL ‘जी-राम-जी’ बिल पर विपक्ष आग-बबूला



संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिनों में देश की राजनीति में अचानक सियासी भूचाल मच गया। मोदी सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-जी रामजी बिल, 2025’ प्रस्तुत किया और इसे पारित कर दिया। बिल में महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने के फैसले के बाद विपक्षी दलों ने संसद परिसर में जोरदार हंगामा किया और संविधान सदन के बाहर धरने पर बैठ गए। विपक्ष की मांग थी कि बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। हालांकि सदन में विपक्ष की गैरमौजूदगी के बीच बिल ध्वनिमत से पास कर दिया गया।
यह विवाद न केवल संसद में गरमाया बल्कि पूरे देश में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मनरेगा का मूल नाम ‘नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट’ (नरेगा) था। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए गांधी का नाम योजना में जोड़ दिया था। उन्होंने कहा, “हमने महात्मा गांधी के आदर्शों को जीवित रखा है। योजना का नाम बदलना सिर्फ आधुनिक भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप किया गया है। यह किसी का अपमान नहीं है।” विपक्षी दलों ने बिल पारित होने के बाद इसे महात्मा गांधी का अपमान करार देते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “सत्र की शुरुआत रवींद्रनाथ टैगोर के अपमान से हुई और अंत में महात्मा गांधी के नाम से खिलवाड़ करके इतिहास को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने तीन आधुनिक भारत निर्माणकर्ताओं टैगोर, गांधी और जवाहरलाल नेहरू के योगदान को नकारने की नीति अपनाई है। यह इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास है।” संसद में वंदे मातरम् पर हुई बहस भी इसी विवाद के बीच छिड़ी। जयराम रमेश ने कहा कि 1937 में टैगोर की सिफारिश पर ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने निर्णय लिया था कि वंदे मातरम् के पहले दो छंदों को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की रणनीति इस देश के महान नेताओं के योगदान को कमतर दिखाने और उन्हें बदनाम करने की रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि मैं अपनी मां की और भारत मां की कसम खाकर कहता हूं कि ये बिल गरीबों की भलाई के लिए नहीं है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने विकसित भारत-जी रामजी बिल पर कहा- संसद का सत्र इतने दिनों से चल रहा है लेकिन आप आखिरी दिनों में कुछ बिल लेकर आते हैं और उसके लिए कम समय रखते हैं। उसे हड़बड़ी में पास करते हैं। ये अपने आप में संदिग्ध बात है। उन्होंने कहा- प्रदूषण पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? चर्चा होनी चाहिए, सबकी बात सुननी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा- मोदी सरकार ने एक दिन में मनरेगा के 20 साल खत्म कर दिए। बिल बिना ठीक से जांच-पड़ताल के संसद में पास कर दिया गया। मोदी के लक्ष्य साफ है। ग्रामीण भारत, खासकर पिछड़े वर्गों की ताकत को कमजोर करना, सत्ता को केंद्रीकृत करना और फिर सुधार के नाम पर नारे बेचना। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि मनरेगा योजना से गांधी का नाम हटाना गलत संदेश देता है। यह गरीब और मजदूरों की कल्याण योजना के मूल उद्देश्य को कमजोर करने की कोशिश है। विपक्ष के हंगामे के बाद, केंद्र सरकार ने अपने तर्क पेश किए। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत-जी रामजी बिल का उद्देश्य देश को आधुनिक भारत की दिशा में ले जाना है। बिल में कोई भी नेता या इतिहास का अपमान नहीं है। यह सिर्फ योजना के नाम और दृष्टिकोण को आधुनिक बनाना है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजना का नाम बदलना था, न कि किसी का अपमान करना। उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-जी रामजी बिल’ किया गया है ताकि यह योजना ग्रामीण रोजगार और विकास की दिशा में आधुनिक दृष्टिकोण को दर्शा सके। उन्होंने कहा, “यह बिल ग्रामीण भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए लाया गया है।




केंद्र सरकार ने शीतकालीन सत्र में आठ विधेयक पास कराए—




संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को खत्म हो गया। शीतकालीन सत्र में 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक कुल 14 बिल लाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, लगातार विपक्ष और सरकार के बीच बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच केवल 8 बिल पास हो सके। दो बिलों को कमेटी में भेजा गया और कुछ बिल पेश ही नहीं किए गए। इनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेने के लिए लाया गया ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ शामिल है जिसे लेकर विपक्ष ने भारी विरोध दर्ज कराया। सदन ने ‘भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन (शांति) विधेयक, 2025’, ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ और वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें-प्रथम बैच और संबंधित विनियोग (संख्याक 4) विधेयक, 2025 को भी पारित किया। देश में अप्रचलित एवं पुराने हो चुके 71 कानूनों को निरस्त और संशोधित करने के प्रस्ताव वाले ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’ को भी निम्न सदन की स्वीकृति प्राप्त हुई। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के विषय पर चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण से हुई। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत एक दिसंबर को हुई थी। इस सत्र में नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने इंडिगो एयरलाइन्स के परिचालन में व्यवधान के मुद्दे पर सदन में वक्तव्य दिया। लोकसभा ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासन वाले संस्थान बनाने के उद्देश्य से लाए गए ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने को मंजूरी दी। इस बीच, विकसित भारत-जी रामजी बिल पारित होना सत्र का सबसे विवादित और चर्चित मुद्दा बन गया। विपक्ष ने बिल पारित होने के बाद कहा कि मोदी सरकार इस सत्र के दौरान महात्मा गांधी और अन्य आधुनिक भारत के निर्माणकर्ताओं के योगदान को नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है। यह हमारे देश के इतिहास और पहचान के साथ खिलवाड़ है। सरकार ने इस बिल के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है। विपक्ष ने संसद परिसर के बाहर धरने के दौरान जोर देकर कहा कि वे इस बिल के खिलाफ सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक उपाय अपनाएंगे। वहीं, भाजपा के नेताओं ने विपक्ष के हंगामे को राजनीतिक तौर पर औचित्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि इस बिल का उद्देश्य केवल योजना की आधुनिक और विकास-केंद्रित दिशा को दर्शाना है। मनरेगा योजना, जो देश में ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजना रही है, उसके नाम में बदलाव और गांधी का नाम हटाना राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे योजना की कार्यक्षमता और ग्रामीण रोजगार की दिशा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, विपक्ष इसे देश की राजनीति और इतिहास के साथ खिलवाड़ मान रहा है। सत्र के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर कहा कि उनका उद्देश्य देश को आधुनिक और विकसित भारत की दिशा में ले जाना है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिल का मकसद सिर्फ योजना का नाम बदलकर इसे विकास और रोजगार के नजरिए से और अधिक सार्थक बनाना है। विपक्ष इसे न केवल महात्मा गांधी के अपमान के रूप में देख रहा है, बल्कि इसे मोदी सरकार की ‘इतिहास बदलने की कोशिश’ के रूप में भी प्रचारित करने की रणनीति बना रहा है। कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र ने राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। मोदी सरकार का बड़ा फैसला, विकसित भारत-जी रामजी बिल का पारित होना, विपक्ष का जोरदार विरोध, गांधी नाम विवाद और धरने प्रदर्शन ने संसद और देश की राजनीति में नए सियासी भूचाल को जन्म दे दिया है।



ग्रामीण भारत की आजीविका की मजबूत रीढ़ है मनरेगा–




महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) देश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक है। इसकी शुरुआत वर्ष 2005 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और बेरोजगार परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का मजदूरी आधारित रोजगार देने की कानूनी गारंटी दी गई है। मनरेगा के तहत काम मांगने वाले वयस्क सदस्य को 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यदि तय समय सीमा में काम नहीं दिया जाता, तो संबंधित लाभार्थी को बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। योजना का मुख्य उद्देश्य केवल रोजगार देना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना भी है, जिससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। इस योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, तालाब निर्माण, खेत तालाब, सड़क निर्माण, वृक्षारोपण, सिंचाई नहरों की खुदाई, भूमि सुधार और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य कराए जाते हैं। इससे न सिर्फ लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता है, बल्कि गांवों की उत्पादन क्षमता और पर्यावरण संतुलन भी बेहतर होता है। मनरेगा की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया है। कानून के अनुसार कम से कम एक-तिहाई रोजगार महिलाओं को दिया जाना अनिवार्य है। साथ ही मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खाते में किया जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता है। ग्रामीण पलायन रोकने में भी मनरेगा की अहम भूमिका मानी जाती है। गांव में ही काम मिलने से लोगों को शहरों की ओर मजबूरी में जाने से राहत मिलती है। यही कारण है कि मनरेगा को ग्रामीण भारत की आर्थिक सुरक्षा की ढाल और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है। समय-समय पर बजट आवंटन, मजदूरी दर और काम के स्वरूप को लेकर इस योजना पर राजनीतिक बहस भी होती रही है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि मनरेगा ने देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के जीवन में स्थिरता और सम्मानजनक रोजगार का रास्ता खोला है। फिलहाल केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलने संबंधी विधेयक सांसद के दोनों सदनों में पारित करा लिया है। अब इस योजना का नाम “विकसित भारत-जी रामजी” होगा।

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