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August 2, 2026
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स्वर कोकिला सुमन कल्याणपुर नहीं रहीं, 89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस



मुंबई। भारतीय संगीत जगत से एक युगांतकारी खबर सामने आई है। अपनी मधुर और मखमली आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वाली वरिष्ठ पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई स्थित उनके आवास पर 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उन्होंने रविवार रात करीब आठ बजे शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।

परिवार के अनुसार, जीवन के अंतिम दिनों में सुमन कल्याणपुर अपने ही गाए गीतों को सुन रही थीं। संगीत के प्रति उनका यह समर्पण आखिरी समय तक कायम रहा। सोमवार को सुबह 11:30 से 12 बजे के बीच मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू हैं।

सुमन कल्याणपुर हिंदी फिल्म संगीत की उन चुनिंदा गायिकाओं में शामिल रहीं, जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उस दौर में जब लता मंगेशकर का संगीत जगत पर दबदबा था, तब भी सुमन कल्याणपुर ने अपनी अलग शैली और सुरीली आवाज के दम पर श्रोताओं के दिलों में विशेष स्थान बनाया।

उन्होंने ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’, ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’, ‘दिल एक मंदिर है’ और ‘मेरे महबूब ना जा’ जैसे अनेक सदाबहार गीतों को अपनी आवाज दी। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, बंगाली, कन्नड़, असमी, गुजराती, उड़िया और अन्य भारतीय भाषाओं में भी हजारों गीत गाए।

साल 2023 में भारत सरकार ने संगीत क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें Padma Bhushan से नवाजा था। यह सम्मान उनके छह दशक से अधिक लंबे संगीत सफर और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान की आधिकारिक पहचान बना।

अपनी आवाज की तुलना अक्सर लता मंगेशकर से किए जाने पर भी सुमन कल्याणपुर ने हमेशा विनम्रता बनाए रखी। वर्ष 2022 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने लता मंगेशकर को अपनी घनिष्ठ मित्र बताते हुए कहा था कि उनसे मिलना किसी सहेली से मिलने जैसा अनुभव होता था।

सुमन कल्याणपुर के निधन से भारतीय संगीत जगत ने अपनी एक अनमोल धरोहर खो दी है। उनकी आवाज में गाए गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा और संगीत की अमूल्य विरासत बने रहेंगे। संगीत प्रेमियों के दिलों में उनका नाम और उनके गीत हमेशा जीवित रहेंगे।

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