केदारनाथ धाम में नेताओं और वीआईपी लोगों की आवभगत पर मंदिर समिति के धन खर्च किए जाने के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। समिति की ओर से चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है, जिसे 20 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि कुछ नेताओं और उनके परिजनों के केदारनाथ प्रवास के दौरान भोजन, आवास और अन्य व्यवस्थाओं पर मंदिर समिति की ओर से बड़ी रकम खर्च की गई। आरोपों के अनुसार, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी और भाजपा नेता नेहा जोशी के दो दिवसीय प्रवास पर करीब 60 हजार रुपए खर्च किए गए। वहीं केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर लगभग 37 हजार 500 रुपए खर्च दर्शाए गए हैं।
मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और मंदिर समिति को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा आस्था से दानपात्र में डाली गई राशि का उपयोग धार्मिक व्यवस्थाओं, तीर्थयात्रियों की सुविधाओं और धाम के विकास कार्यों में होना चाहिए, न कि विशेष लोगों की मेहमाननवाजी में।
विवाद बढ़ने पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मामला गंभीर है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।
चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान भी मंदिर समिति को प्राप्त होता है। ऐसे में दान की राशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा अब फिर चर्चा में आ गया है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

