बाबा केदार के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु 16 से 18 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय कर केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। खड़ी चढ़ाई, संकरे रास्ते, बदलते मौसम और भारी भीड़ के कारण यात्रा चुनौतीपूर्ण होती है। अब सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा बढ़ाने के लिए यात्रा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है।
प्रस्तावित योजना के तहत पुराने पैदल मार्ग पर टॉयलेट, बैठने की व्यवस्था और यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के लिए अलग स्थान विकसित किए जाएंगे। साथ ही पुराने मार्ग को पैदल श्रद्धालुओं के लिए और नए मार्ग को घोड़े-खच्चरों के संचालन के लिए इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे वन-वे व्यवस्था लागू हो सके और भीड़ तथा दुर्घटनाओं का जोखिम कम हो।
सरकार बड़ी लिनचौली से आगे के सबसे कठिन हिस्से में मार्ग का रिएलाइनमेंट करने की संभावनाएं भी तलाश रही है। उद्देश्य खड़ी चढ़ाई को कम कर यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। इसके लिए मौसम साफ होने के बाद लोक निर्माण विभाग मौके पर सर्वे करेगा। जरूरत पड़ने पर रास्ते की लंबाई थोड़ी बढ़ाई जा सकती है, लेकिन चढ़ाई कम करने पर जोर रहेगा।
गौरतलब है कि रामबाड़ा-गरुड़चट्टी होते हुए जाने वाला पुराना मार्ग 2013 की आपदा में बह गया था, जिसे बाद में दोबारा तैयार किया गया। अब इसी मार्ग को अगले साल से पैदल यात्रियों के लिए खोलने की योजना बनाई जा रही है, जबकि नए मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही कराई जाएगी।
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे के अनुसार, मौसम अनुकूल होने के बाद सर्वे कर नई एलाइनमेंट की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई से राहत मिल सके और केदारनाथ यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बन सके।

