उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क को नई रफ्तार देने की दिशा में योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में दो महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की संभावना है। इनमें करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 333 किलोमीटर लंबे विंध्य एक्सप्रेसवे और 117 किलोमीटर लंबे विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव शामिल है।
प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे को प्रदेश के सबसे अहम ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में माना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे के अंतिम छोर प्रयागराज से शुरू होकर भदोही के ज्ञानपुर, मिर्जापुर के चुनार, रॉबर्ट्सगंज, रेणुकूट होते हुए बभनी के रास्ते छत्तीसगढ़ सीमा तक पहुंचेगा। शुरुआती चरण में इसे छह लेन के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि भविष्य में यातायात बढ़ने पर इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आएगा। इससे उद्योग, पर्यटन, कृषि और व्यापार को नई गति मिलने के साथ-साथ लाखों लोगों की यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक तेज और सुरक्षित हो जाएगी। लंबे समय से बेहतर सड़क संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे इलाकों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट बैठक में 117 किलोमीटर लंबे विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी मिलने की संभावना है। यह लिंक एक्सप्रेसवे विंध्य क्षेत्र को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, जिससे प्रदेश के पूर्वी हिस्सों तक आवागमन और माल परिवहन और अधिक सुगम होगा।
इसके अलावा सरकार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक लिंक एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से गंगा एक्सप्रेसवे (फर्रुखाबाद मार्ग) और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की अन्य प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए विकासकर्ताओं के चयन संबंधी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) दस्तावेजों को भी मंजूरी दे सकती है।
यदि इन प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लगती है तो उत्तर प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा। सरकार का लक्ष्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को आधुनिक सड़क अवसंरचना से जोड़कर निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

