भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) अपनी भुगतान इकाई आईआरसीटीसी पेमेंट्स का विस्तार कर रही है। अब वह न केवल अपने टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर होने वाले लेनदेन को संभालेगी बल्कि सरकारी ग्राहकों को भी अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएगी। सूत्रों के अनुसार, इससे आईआरसीटीसी की सालाना भुगतान प्रॉसेसिंग का मूल्य करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
आईआरसीटीसी पेमेंट्स आईआरसीटीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। उसे पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से भुगतान एग्रीगेटर बनने की सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी और अब वह अपनी क्षमता तैयार कर रही है। इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा कि कंपनी अपने डिजिटल भुगतान स्टैक के निर्माण के साथ-साथ परिचालन में भी विस्तार कर रही है। कंपनी ने तकनीकी सहायता प्रदान करने हेतु एक प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाता (टीएसपी) को भी नियुक्त किया है। फिलहाल आईआरसीटीसी रोजाना 15 लाख से अधिक टिकट बुकिंग को संभालने के लिए कई भुगतान सेवा प्रदाताओं के साथ काम करती है।
मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा, ‘तमाम कंपनियों के मौजूद होने के बावजूद सरकारी ग्राहक क्षेत्र में फिलहाल किसी का भी एकाधिकार नहीं है। रेलवे 1.4 अरब से अधिक भारतीयों के लिए एकाधिकार वाला उपक्रम है। आईआरसीटीसी ने लाभ कमाने के उद्देश्य से खुद की भुगतान इकाई स्थापित की है। इससे बाजार में उसे बढ़त मिलती है।’
आईआरसीटीसी ने इस संबंध में जानकारी के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया। भुगतान इकाई को पूरी तरह परिचालन शुरू करने के लिए आरबीआई से पूर्ण मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
फिलहाल आईआरसीटीसी का भुगतान गेटवे आई-पे इस प्लेटफॉर्म पर सकल मर्केंडाइज मूल्य (जीएमवी) के लगभग 20 फीसदी को प्रॉसेस करता है जो 13,000 करोड़ रुपये के लेनदेन के बराबर है। आईआरसीटीसी पेमेंट्स का लक्ष्य रेलवे टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म के 70,000 करोड़ रुपये से अधिक के जीएमवी को प्रॉसेस करना है।
एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि सरकारी ग्राहकों में नगर निकाय, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भुगतान, ट्रेजरी एवं अन्य सार्वजनिक यूटिलिटी शामिल हैं। इन्हें साथ लाने से डिजिटल भुगतान मूल्य में कंपनी की हिस्सेदारी उसके मुख्य प्लेटफॉर्म से भी अधिक होने की उम्मीद है।
सूत्रों ने कहा, ‘आईआरसीटीसी पेमेंट्स भविष्य में सरकारी ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा भुगतान एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म बनना चाहती है। ’
आईआरसीटीसी ने वित्त वर्ष 2024-25 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भी अपने प्लेटफॉर्म के साथ-साथ सरकारी विभागों और निजी कंपनियों के लेनदेन को प्रॉसेस करने के अपने इरादे का संकेत दिया था।
उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि आईआरसीटीसी के फिनटेक क्षेत्र में उतरने से फिलहाल उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने इसकी वजह मूल्य निर्धारण, तकनीकी दक्षता और प्रतिभा से जुड़े सवालों को बताया। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर कंपनी को शायद अधिक ध्यान देने की जरूरत हो सकती है।
फिलहाल भारत में कारोबार करने वाली प्रमुख भुगतान एग्रीगेटर कंपनियों में एवेन्यूजएआई, बिलडेस्क, कैशफ्री पेमेंट्स, पेयू, फोनपे, रेजरपे आदि शामिल हैं।

