हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण रोस्टर के नियमों में अहम बदलाव किया है। नए संशोधित प्रावधानों के अनुसार अधिकांश पंचायतों में आरक्षण तय नियमों के अनुसार लागू होगा, जबकि सीमित संख्या में प्रशासन को बदलाव का अधिकार दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और लंबे समय से लंबित विसंगतियों को दूर किया जा सकेगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर लागू करने की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। संशोधित नियमों के तहत अब राज्य की 95 प्रतिशत पंचायतों में आरक्षण रोस्टर पूरी तरह निर्धारित नियमों के अनुसार लागू किया जाएगा। वहीं शेष 5 प्रतिशत पंचायतों में उपायुक्त (डीसी) को परिस्थितियों के आधार पर आरक्षण रोस्टर में बदलाव करने का अधिकार दिया गया है।
सरकार की ओर से जारी संशोधन में कहा गया है कि कई क्षेत्रों में भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियां अलग-अलग होने के कारण तय रोस्टर लागू करने में दिक्कतें सामने आती थीं। ऐसे मामलों में अब जिला प्रशासन को सीमित अधिकार देकर लचीलापन प्रदान किया गया है। इससे उन पंचायतों में आरक्षण तय करने में आसानी होगी, जहां पहले तकनीकी या व्यावहारिक बाधाएं सामने आती थीं।
नए प्रावधान के मुताबिक डीसी केवल विशेष परिस्थितियों में ही 5 प्रतिशत पंचायतों के भीतर आरक्षण रोस्टर में बदलाव कर सकेंगे। इसके लिए उचित कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल आरक्षण प्रणाली में संतुलन आएगा बल्कि चुनाव प्रक्रिया को भी समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच यह फैसला लिया गया है, ताकि आरक्षण को लेकर होने वाले विवादों को कम किया जा सके। पहले कई पंचायतों में आरक्षण रोस्टर को लेकर आपत्तियां और प्रशासनिक अड़चनें सामने आती थीं, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होती थी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 95 प्रतिशत पंचायतों में आरक्षण पूरी तरह तय फार्मूले के अनुसार ही लागू रहेगा और किसी प्रकार की मनमानी की गुंजाइश नहीं होगी। केवल सीमित 5 प्रतिशत पंचायतों में ही जिला प्रशासन को बदलाव की अनुमति दी गई है, वह भी नियमों और औचित्य के आधार पर।
इस निर्णय को पंचायत चुनाव से पहले अहम कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे आरक्षण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और स्थानीय स्तर पर संतुलन बनाते हुए चुनाव समय पर कराए जा सकेंगे।
हिमाचल सरकार का पंचायत चुनाव से पहले बड़ा फैसला: 95% पंचायतों में तय नियमों से आरक्षण, 5% में डीसी बदल सकेंगे रोस्टर
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