बसंत पंचमी पर मां सरस्वती और ब्रह्मा का संयुक्त आशीर्वाद लेने आते हैं भक्त, अनोखी है इस मंदिर की प्रतिमा - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
May 12, 2026
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धर्म/अध्यात्म

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती और ब्रह्मा का संयुक्त आशीर्वाद लेने आते हैं भक्त, अनोखी है इस मंदिर की प्रतिमा

राजस्थान के पुष्कर में बने श्री ब्रह्मा सरस्वती मंदिर के बारे में सभी जानते हैं, जहां ज्ञान, बुद्धि और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा ब्रह्मा के साथ की जाती है। वहीं, तेलंगाना में भी मां सरस्वती और ब्रह्मा का अद्भुत मंदिर मौजूद है, जहां बसंत पंचमी के लिए विशेष अनुष्ठान और पूजा-यज्ञ का आयोजन किया जाता है।

खास बात ये है कि मंदिर बाकी मंदिरों की प्रतिमाओं से बिल्कुल अलग है। यहां मां सरस्वती और ब्रह्मा की प्रतिमा को एक ही पत्थर में उकेरकर बनाया गया है।

तेलंगाना के सूर्यापेट जिले के पलामरी गांव में श्री ब्रह्मा सरस्वती मंदिर स्थित है, जो अपनी अनोखी प्रतिमा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह देश का पहला मंदिर है, जहां एक ही पत्थर में मां सरस्वती और ब्रह्मा की प्रतिमा को बारीकी से उकेरा गया है। इस अद्वितीय कला को काकतीय कहा जाता है। काकतीय काल के समय एक ही पत्थर में दो प्रतिमाओं को उकेरने का काम बहुत अच्छे तरीके से किया जाता था।

बसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर में भक्तों की लंबी लाइन देखने को मिलती है। भक्त मां सरस्वती और ब्रह्मा का संयुक्त आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। इस मौके पर मां सरस्वती को पीले वस्त्र भेंट कर भक्त अपनी मनोकामना मांगते हैं। मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर अक्षराभ्यास की परंपरा होती है, जिसमें छोटे बच्चों को अपना अक्षर लिखने का अभ्यास कराया जाता है। इसके साथ ही मंदिर में संगीत और कला को मानने वाले भक्त भी मां सरस्वती की विशेष पूजा करते हैं। यह मंदिर बच्चों को साक्षरता सिखाने से उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार लाने के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर के इतिहास की बात करें तो मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में काकतीय राजा गणपतिदेव के शासन काल के दौरान हुआ था। माना जाता है कि काकतीय काल के राजा जागीरदार राजा रामिरेड्डी और बेथिरेड्डी ने मंदिर की नींव स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में एक अनोखी परंपरा का निर्वाहन भी सालों से होता आया है। मंदिर में मां सरस्वती की साड़ी उन भक्तों को भेंट की जाती है, जिन्होंने शब्दों से नहीं बल्कि मधुर आवाज से गाया। उन भक्तों को मां की पहनी हुई साड़ी आशीर्वाद स्वरूप भेंट की जाती है। ये कला और संगीत को पूजने वाले लोगों की गहरी भक्ति को दिखाता है।

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