चारधाम यात्रा के बढ़ते श्रद्धालु दबाव और मानसून सीजन की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर यात्रा व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, यातायात प्रबंधन, शौचालयों, पार्किंग स्थलों और होल्डिंग एरिया की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और व्यवस्थाओं की प्रतिदिन मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा अब मानसून के संवेदनशील चरण में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में भूस्खलन, अतिवृष्टि और आपदा संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबंधन, पुलिस, स्वास्थ्य और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए। जहां भी मशीनरी, मानव संसाधन या अन्य सुविधाओं की अतिरिक्त आवश्यकता हो, उन्हें तत्काल उपलब्ध कराया जाए ताकि यात्रा निर्बाध रूप से संचालित होती रहे।
बैठक में मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर रियल टाइम मॉनिटरिंग बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों पर त्वरित राहत दलों की तैनाती और मौसम विभाग से लगातार समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियां पूरी तरह तैयार रहें।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित चारधाम यात्रा की अव्यवस्थाओं से जुड़े कुछ वीडियो को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यात्रा और सनातन परंपरा की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से भ्रामक वीडियो प्रसारित कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की भी मजबूत आधारशिला है, जिससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
इस बीच यात्रा के आंकड़े भी रिकॉर्ड उत्साह का संकेत दे रहे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार यात्रा के पहले 44 दिनों में 29.85 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम पहुंच चुके हैं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार व्यवस्थाओं को और मजबूत करने तथा मानसून के दौरान यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने पर विशेष फोकस कर रही है।

