असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को आर्थिक राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित चार जिलों के पात्र कर्जदारों को 6 महीने का लोन मोरेटोरियम दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें अपनी मासिक ऋण किस्त (EMI) जमा नहीं करनी होगी।
यह फैसला राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की विशेष बैठक में लिया गया, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नाबार्ड (NABARD), भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अन्य प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सरकार के अनुसार, यह सुविधा केवल उन लोगों को मिलेगी जो बाढ़ से सीधे प्रभावित हुए हैं। शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिले इस राहत योजना के दायरे में शामिल किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जरूरत के अनुसार ऋण पुनर्भुगतान की अवधि को 1 वर्ष से बढ़ाकर अधिकतम 7 वर्ष तक किया जा सकता है। वहीं, जिन छोटे दुकानदारों का कारोबार बाढ़ में प्रभावित हुआ है, उन्हें बिना किसी अतिरिक्त गारंटी के उनके मौजूदा लोन खाते में 10,000 रुपये की अतिरिक्त ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बैंकों द्वारा प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति की स्थिति का आकलन करने के बाद ही यह राहत प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे अपनी EMI समय पर जमा करते रहें ताकि बैंकिंग व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
इस बीच, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में शिवसागर जिले में डूबने से दो और लोगों की मौत हो गई, जिससे इस मानसून सीजन में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। फिलहाल चार जिलों में करीब 2.12 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जिनमें सबसे अधिक प्रभावित चराईदेव जिला है।
हालांकि बाढ़ की स्थिति में पहले की तुलना में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन प्रशासन अब भी 112 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित कर रहा है, जहां 75 हजार से अधिक लोगों को आश्रय और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने केंद्र सरकार से पुनर्वास, बुनियादी ढांचे की मरम्मत और आजीविका बहाली के लिए विशेष राहत पैकेज देने तथा इस बाढ़ को ‘असामान्य, उच्च-तीव्रता वाली प्राकृतिक आपदा’ घोषित करने का अनुरोध किया है।

