उत्तराखंड अब अपनी पहचान केवल पर्यटन और चारधाम तक सीमित नहीं रखना चाहता। राज्य सरकार उद्योग, स्टार्टअप, निवेश और रोजगार के नए अवसरों के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सामने राज्य के निवेश मॉडल और भविष्य की संभावनाएं रखीं।
मुख्यमंत्री ने बड़े उद्योग समूहों को उत्तराखंड में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि सरकार उद्योगों की जरूरत के मुताबिक जमीन, बुनियादी सुविधाएं और अनुकूल नीतियां उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि 2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद राज्य की औद्योगिक पहचान में बदलाव आया है।
निवेश को जमीन पर उतारने पर जोर
धामी ने बताया कि सरकार ने निवेश प्रस्तावों को केवल एमओयू तक सीमित रखने के बजाय उन्हें धरातल पर उतारने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां बनाई हैं। सरकार का लक्ष्य निवेश बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसर पैदा करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर पर फोकस
मुख्यमंत्री ने माना कि पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में बड़े औद्योगिक लैंड बैंक की सीमाएं हैं। इसके बावजूद हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में उद्योगों की जरूरत के अनुसार जमीन उपलब्ध है। पंतनगर को कृषि के साथ औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को भी इसी विकास मॉडल से जोड़ा जा रहा है।
पहाड़ी जिलों में भी बढ़ेगा औद्योगिक निवेश
सरकार अब औद्योगिक गतिविधियों को पर्वतीय जिलों तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली में औद्योगिक पार्क विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ‘एक जिला-दो उत्पाद’ जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और छोटे उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
34 हजार से ज्यादा नियुक्तियां, स्टार्टअप भी बढ़े
मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं। वहीं, राज्य में स्टार्टअप की संख्या करीब 700 से बढ़कर लगभग 2 हजार हो गई है।
होमस्टे, होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय कारोबार के जरिए युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर भी सरकार का जोर है। ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला’ के तहत 13 हजार से ज्यादा लोग प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
पलायन रोकने के लिए रोजगार पर जोर
धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पहाड़ की जवानी और पहाड़ के संसाधनों को पहाड़ में ही आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत वृद्धि का दावा करते हुए पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय कारोबार को इसका प्रमुख आधार बताया।
कनेक्टिविटी को निवेश की ताकत बताया
निवेशकों के सामने मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की बेहतर होती कनेक्टिविटी को भी प्रमुख ताकत के रूप में पेश किया। उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय कम हुआ है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाओं का भी उन्होंने जिक्र किया।
मारुति और हुंडई समेत ऑटो कंपनियों को न्योता
मुख्यमंत्री ने मंच से मारुति और हुंडई समेत देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व को उत्तराखंड में निवेश का सीधा न्योता दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उद्योगों की जरूरत के अनुसार जमीन, बुनियादी सुविधाएं और अनुकूल नीतियां उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों से आगे ले जाकर उद्योग, स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्थानीय उत्पाद और स्वरोजगार से जोड़ना है। इसके जरिए मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पर्वतीय जिलों में भी निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

