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August 14, 2026
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उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था की नई शुरुआत : मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, सभी समुदायों के विद्यार्थियों को मिलेगी आधुनिक और समान शिक्षा

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य के मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की औपचारिक शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में इस नई व्यवस्था का शुभारंभ किया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल संस्थागत पुनर्गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य राज्य के सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए और विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें वितरित कर नई व्यवस्था का शुभारंभ किया।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप लगातार आधुनिक बनाया जा रहा है। नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी समुदाय की धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना है ताकि वे बदलती दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सकें और भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे रोजगार, नवाचार, तकनीक और कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। यही कारण है कि नई शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और आधुनिक संसाधनों को विशेष महत्व दिया गया है।


विद्यार्थियों को मिली एनसीईआरटी की पुस्तकें, संस्थानों को सौंपे गए मान्यता प्रमाण पत्र


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए। साथ ही विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें भी वितरित कीं। उन्होंने कहा कि मान्यता प्राप्त संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो ज्ञानवान, संस्कारित, आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नागरिक बन सकें।


एआई, मशीन लर्निंग और डिजिटल शिक्षा पर रहेगा विशेष जोर


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक और नवाचार का युग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक, रोबोटिक्स और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार बन चुके हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि उत्तराखंड का प्रत्येक विद्यार्थी आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जुड़कर प्रतिस्पर्धी बने। उन्होंने कहा कि विज्ञान, गणित, कंप्यूटर शिक्षा और व्यावसायिक कौशल को विद्यालय स्तर से ही मजबूत किया जाएगा।


धार्मिक पहचान सुरक्षित, आधुनिक शिक्षा होगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किसी भी समुदाय की आस्था, धार्मिक परंपराओं या सांस्कृतिक विरासत को प्रभावित करने के लिए नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों और धार्मिक मूल्यों से जुड़े रहें, लेकिन साथ ही आधुनिक शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता हासिल कर आत्मनिर्भर भी बनें।


सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को मिलेगा समान अवसर


मुख्यमंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था के अंतर्गत राज्य के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान रूप से लाभ मिलेगा। जिन समुदायों को पहले अपेक्षित प्रतिनिधित्व या अवसर नहीं मिल पाए थे, उन्हें भी अब समान भागीदारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ प्राप्त होगा। इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक समावेशी और संतुलित बनेगी।


शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा प्राधिकरण का फोकस


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल संस्थानों को मान्यता देने तक सीमित नहीं रहेगा। यह शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, आधुनिक पाठ्यक्रम, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नई पहल राज्य में शिक्षा सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी और आने वाले वर्षों में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नई पहचान और नई दिशा प्रदान करेगी।

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