उत्तर प्रदेश में मंगलवार को एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और ग्रामीण मार्गों का एक विशाल नेटवर्क तैयार हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आधारभूत संरचना और सड़क मार्ग विकास पर विशेष ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री पहले ही उत्तर प्रदेश को 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं। वे भलीभांति जानते हैं कि उद्योगों के विकास और निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रदेश में सड़कों का गोल्डन नेटवर्क तैयार करना अत्यंत आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य
डबल इंजन सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य बन गया है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 3 एक्सप्रेसवे थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इससे यातायात और परिवहन में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है और आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम मिला है।
गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे तक आसान पहुंच के लिए उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का विकास
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे की संख्या 1949-50 में शून्य से बढ़कर 2016-17 में 3 और 2025-26 में 22 हो गई है। इनमें वर्तमान में निर्माणाधीन और प्रस्तावित एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। सड़क अवसंरचना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे तक आसान पहुंच के लिए उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। साथ ही सभी जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाले एक व्यापक सड़क नेटवर्क ग्रिड का भी निर्माण कार्य प्रगति पर है।
भारत के कुल राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 41%
एक्सप्रेसवे के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग भी प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार विकास और उपलब्धियों की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है। वर्ष 2004-05 से 2023-24 (अंतिम उपलब्ध आंकड़े) के बीच प्रदेश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दोगुने से अधिक बढ़कर 5,599 किलोमीटर से 12,292 किलोमीटर हो गया है। भारत के कुल राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 2016-17 के 7.48 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 41 प्रतिशत पहुंच गई है।
शहरों और ग्रामीण इलाकों में यातायात सुगम हुआ
सड़क नेटवर्क का यह विस्तार राज्य के भीतर कनेक्टिविटी सुधारने और आर्थिक विकास को गति देने के ठोस प्रयासों का परिणाम है। इसके कारण शहरों और ग्रामीण इलाकों में यातायात सुगम हुआ है। व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान हुई है, जिससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में उल्लेखनीय वृद्धि ने न केवल अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी को मजबूती दी है, बल्कि माल ढुलाई को भी अधिक कुशल और तेजी से संभव बनाया है।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने पिछले आठ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने पिछले आठ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कुल सड़क लंबाई वर्ष 2013-14 में 51,549.23 किमी से बढ़कर 2016-17 में केवल 56,846.93 किमी हुई थी। वहीं, 2017 के बाद सड़कों के विस्तार ने रफ्तार पकड़ी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों तथा बेहतर क्रियान्वयन के कारण कुल सड़क लंबाई वर्ष 2024-25 तक बढ़कर 77,425.14 किमी हो गई है, जिससे अंतिम छोर तक ग्रामीण कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

