उत्तराखंड के चमोली जनपद के सलूद डुंग्रा गांव में विश्व धरोहर रम्माण का शानदार मंचन किया गया। यह आयोजन स्थानीय संस्कृति को जीवंत करने और पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रतीक बना। यूनेस्को द्वारा 2009 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित रम्माण महाभारत की कथा पर आधारित पारंपरिक लोक नाट्य है, जो रामलीला की तर्ज पर प्रस्तुत होता है।
गांव के प्राचीन मंदिर परिसर में सैकड़ों ग्रामीणों और पर्यटकों की उपस्थिति में रम्माण का यह तीन दिवसीय उत्सव शुरू हुआ। कलाकारों ने रंग-बिरंगे पारंपरिक वेशभूषा में भगवान राम, सीता, रावण और हनुमान के किरदार निभाए। ढोल-दमाऊ, रणसिंग और तूरा के थिरकते स्वरों के साथ नृत्य, संवाद और संगीत का संगम दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। स्थानीय देवता नंदा देवी की कथा को भी इसमें बुना गया, जो गढ़वाली संस्कृति की जीवंत छवि प्रस्तुत करता है।
जिला प्रशासन, संस्कृति विभाग और ग्राम पंचायत के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश में बधाई दी। उन्होंने कहा, “रम्माण हमारी अमूल्य धरोहर है, इसे संरक्षित कर वैश्विक पटल पर पहुंचाना हमारा कर्तव्य।” पर्यटन मंत्री सत्येंद्र सिंह नेगी ने भी शुभकामनाएं दीं।
यह आयोजन सलूद डुंग्रा को सांस्कृतिक हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। पर्यटकों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर उत्साह बढ़ाया। रम्माण न केवल मनोरंजन, बल्कि नैतिक मूल्यों का संदेश देता है। आने वाले वर्षों में इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना है, जो चमोली को सांस्कृतिक राजधानी बनाएगा।
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