आपदा से जूझता उत्तराखंड, प्रकृति दिखा रही विकराल तस्वीर - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
April 21, 2026
Daily Lok Manch
Recent उत्तराखंड

आपदा से जूझता उत्तराखंड, प्रकृति दिखा रही विकराल तस्वीर



उत्तराखंड लगातार कुदरत के कहर से जूझ रहा है। धराली और थराली में बादल फटने की घटनाओं में मौत और तबाही हुई, लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर जिलों में भी बादल फटे और फिर से भारी तबाही देखने को मिली। इन हादसों में अब तक कुल 5 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। कई गांव मलबे में दब गए, सड़कें बह गईं, पुल टूट गए और करोड़ों की संपत्ति बर्बाद हो गई। पहाड़ों में रह रहे परिवारों के लिए यह घटनाएं दहशत और असुरक्षा का नया दौर लेकर आई हैं। देवभूमि की यह पीड़ा केवल जानमाल तक सीमित नहीं है। हर बार जब राज्य विकास की रफ्तार पकड़ने लगता है, तब-तब आपदा उसके कदम रोक देती है। हालिया घटनाओं ने चार धाम यात्रा पर भी गहरा असर डाला है। करोड़ों श्रद्धालु हर साल उत्तराखंड का रुख करते हैं और यह यात्रा प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पहचान का बड़ा आधार है। लेकिन बादल फटने और आपदा की घटनाओं ने इस यात्रा की रौनक को फीका कर दिया है, जिससे सरकार की आमदनी और स्थानीय व्यापारियों का भविष्य दोनों प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हालात पर तुरंत उच्च स्तरीय बैठक की और अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने, फंसे यात्रियों को राहत पहुंचाने और नुकसान का आकलन जल्द से जल्द करने का आदेश दिया। धामी ने साफ कहा कि आपदा कितनी भी बड़ी क्यों न हो, सरकार जनता को अकेला नहीं छोड़ेगी और राज्य को विकास की राह पर आगे ले जाने का संकल्प बरकरार रहेगा। राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक अब तक करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। जिन परिवारों के आशियाने मलबे में दब गए, उनके सामने पुनर्वास की चुनौती सबसे बड़ी है। आपदा की मार झेल रहे इन पहाड़ी गांवों में आज भी भय और अनिश्चितता का माहौल है। उत्तराखंड के सामने फिलहाल दोहरी लड़ाई है। एक ओर आपदा की चोट को सहकर प्रभावितों को राहत और पुनर्वास देना, और दूसरी ओर विकास की गति बनाए रखना। इन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री धामी का यह संदेश साफ है कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, देवभूमि को न केवल आपदा से उबारना है बल्कि उसे विकास की नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाना है। उल्लेखनीय है कि अगस्त के अंत तक उत्तराखंड में असामान्य बारिश का सिलसिला देखने को मिला है। हाल ही में 24 घंटे में राज्यभर में औसतन 369% अधिक बारिश दर्ज की गई। सामान्य 9.1 मिमी की तुलना में यह आंकड़ा 46.6 मिमी तक पहुंच गया। बागेश्वर में यह वृद्धि करीब 2000% और चमोली में 1290% दर्ज की गई, जबकि देहरादून और हरिद्वार समेत कई जिलों में भी 400 से 500% तक ज्यादा बारिश हुई। इसी अवधि में राज्य में कई जगहों पर 7 से 11 सेमी तक बारिश दर्ज हुई, जिसे मौसम विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश की श्रेणी में रखा है। यह मानसून सीजन उत्तराखंड के लिए आपदा और चुनौती दोनों बनकर सामने आया है, क्योंकि लगातार बारिश और बादल फटने की घटनाओं से अब तक कई जनहानि और करोड़ों का नुकसान हो चुका है।



देवभूमि में आपदाएं राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास की रफ्तार पर लगाती हैं ब्रेक



देवभूमि उत्तराखंड में यह आपदाएं केवल जानमाल की हानि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास की रफ्तार को भी बार-बार रोक देती हैं। जब-जब सरकार विकास की ओर बढ़ती है, तब-तब आपदाएं उसकी राह में पहाड़ बनकर खड़ी हो जाती हैं। चार धाम यात्रा जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक और आर्थिक धुरी भी इसका शिकार हो गई है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और इससे प्रदेश को भारी राजस्व मिलता है, लेकिन लगातार हो रही प्राकृतिक आपदाओं ने इस यात्रा की रौनक फीकी कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हालात पर तुरंत उच्च स्तरीय बैठक की और अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना, फंसे यात्रियों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाना और नुकसान का आकलन तेजी से करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि आपदा कितनी भी बड़ी क्यों न हो, राज्य को विकास की राह पर आगे बढ़ने से रोका नहीं जा सकता।
फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती टूट चुकी सड़कों और पुलों को फिर से चालू करना है। कई गांव जिला मुख्यालयों से कटे हुए हैं और वहां राहत दल पहुंचने में घंटों नहीं बल्कि दिनों का वक्त ले रहे हैं। इसी बीच स्थानीय लोग अपने स्तर पर एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। फंसे हुए यात्रियों को भोजन और दवाइयां नहीं मिल पा रहीं, कई जगह गंभीर रूप से घायल लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
बादल फटने की घटनाओं ने गांवों को भी उजाड़ दिया है। मिट्टी और पत्थर से बने घर मलबे में बदल गए हैं और परिवार खुले आसमान के नीचे या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं। इस बीच राज्य सरकार ने  एसडीआरएफ और एनडीआरफ और की टीमें प्रभावित इलाकों में भेज दी हैं और जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि राहत शिविर बनाकर पीड़ितों को तुरंत भोजन और सुरक्षित आश्रय मुहैया कराया जाए।राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि प्रभावितों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए विशेष राहत पैकेज तैयार किया जा रहा है और किसी भी पीड़ित परिवार को सरकार अकेला नहीं छोड़ेगी। उत्तराखंड फिलहाल दोहरी चुनौती से जूझ रहा है।



मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को राहत बचाव कार्यों में  तेजी लाने के दिए निर्देश–



मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और बागेश्वर के कुछ क्षेत्रों में बादल फटने की सूचना प्राप्त होते ही संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से फोन पर बात कर राहत एवं बचाव कार्यों को त्वरित गति से संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और किसी भी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित आपदा प्रबंधन की उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में सभी मूलभूत सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं। सड़क, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में उन्हें तत्काल सुचारू किया जाए। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी और बागेश्वर के जिलाधिकारियों से बादल फटने की घटनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा राहत एवं बचाव कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी नैनीताल से भी मुख्यमंत्री ने बारिश और सड़कों की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मानसून सीजन तक शासन और प्रशासन अलर्ट मोड पर रहे। जिलाधिकारियों द्वारा आपदा राहत कार्यों के लिए जो भी आवश्यक संसाधन और सुविधाएं अपेक्षित हों, उन्हें तत्काल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रभावित परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार मुआवजा शीघ्र उपलब्ध हो। बैठक में प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक ए पी अंशुमान, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय तथा विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते उपस्थित रहे।

Related posts

French Open 2023 N Djokovic Won : नोवाक जोकोविच ने फ्रेंच ओपन जीता, नॉर्वे के कैस्पर रूड को हराया, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी बधाई

admin

Badrinath National Highway washed away भारी बारिश में बद्रीनाथ नेशनल हाईवे का 50 मीटर का हिस्सा भरभरा कर बह गया 

admin

देर रात कड़ाके की ठंड में सीएम धामी ने 35 वरिष्ठ आईएएस, पीसीएस अफसरों को पकड़ा दिए ट्रांसफर के लेटर, जानिए इनके नाम

admin

Leave a Comment