संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू होगा, कई महत्वपूर्ण बिल पेश किए जाएंगे - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
December 5, 2025
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संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू होगा, कई महत्वपूर्ण बिल पेश किए जाएंगे

संसद का शीतकालीन सत्र 01 दिंसबर, सोमवार से शुरू हो रहा है। शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा। एक तरफ जहां सरकार इस दौरान सरकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र, उच्च शिक्षा ढांचा सुधार और कॉरपोरेट/शेयर बाजार विनियम समेत 10 महत्त्वपूर्ण विधेयक रखने जा रही है। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष SIR के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारियों में है। दरअसल, सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने संबंधी विधेयक के साथ अपने सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाएगी। वहीं, विपक्ष द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के मुद्दे के अलावा 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के मुद्दे पर सरकार को घेरने की संभावना है।संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सत्र के दौरान सदन में समन्वय सुनिश्चित करने के लिए रविवार को संसद में राजनीतिक दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई।

सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश करने के लिए कुल 10 विधेयकों को सूचीबद्ध किया है जिनमें निजी कंपनियों के लिए असैन्य परमाणु क्षेत्र को खोलने के प्रावधान वाला एक विधेयक भी शामिल है।

‘परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025’ भारत में परमाणु ऊर्जा के उपयोग और विनियमन को नियंत्रित करने के उद्देश्य लाया जा रहा है।

इस सत्र के लिए उच्च शिक्षा आयोग विधेयक भी सरकार के एजेंडे में है।

लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, प्रस्तावित कानून विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र और स्वशासी संस्थान बनने और मान्यता और स्वायत्तता की एक मजबूत और पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए भारत के एक उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।

राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक भी परिचय के लिए सूचीबद्ध है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए तेज़ और पारदर्शी भूमि अधिग्रहण सुनिश्चित करना है।

कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 भी एजेंडे में शामिल है, जिसका उद्देश्य व्यवसाय करने में आसानी की सुविधा के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 और एलएलपी (सीमित देयता भागीदारी) अधिनियम, 2008 में संशोधन करना है।

इसके अलावा सरकार के एजेंडे में प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (एसएमसी), 2025 है, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992, डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 और प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को एक तर्कसंगत एकल प्रतिभूति बाजार संहिता में समेकित करने का प्रस्ताव करता है।

सरकार मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में संशोधन की भी योजना बना रही है। विधि मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि कानून की धारा 34 में प्रस्तावित संशोधन और कंपनी निदेशकों पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के कारण सरकार को इस मुद्दे को एक समिति के पास भेजना पड़ा है। प्रस्तावित संशोधन इसी का परिणाम है।

पिछले सत्र के दो विधेयक भी विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं। बुलेटिन के अनुसार, वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी एजेंडे में है।

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