उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने कार्यक्रम और तारीखों को लेकर महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर दी है। गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में जनगणना का मुख्य चरण 1 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 4 जनवरी 2027 तक चलेगा। इसके बाद 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण का कार्य किया जाएगा। हालांकि, राज्य के बर्फ से ढके क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया जाएगा।
16 से 30 नवंबर तक मिलेगा सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प
जनगणना प्रक्रिया में इस बार नागरिकों को Self-Enumeration यानी स्वयं गणना का विकल्प भी दिया गया है। इसके लिए 16 नवंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी और अपने परिवार से संबंधित आवश्यक जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।
सेल्फ एन्यूमरेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 दिसंबर से जनगणना का मुख्य चरण शुरू होगा। इस दौरान संबंधित कर्मचारी घर-घर जाकर जनसंख्या और परिवारों से जुड़ी आवश्यक जानकारी जुटाएंगे। यह प्रक्रिया 4 जनवरी 2027 तक चलेगी।
5 जनवरी 2027 होगी Reference Date
अधिसूचना के अनुसार उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों को छोड़कर प्रदेश के लिए जनगणना की Reference Date 5 जनवरी 2027 की रात 00:00 बजे निर्धारित की गई है। यानी जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों के निर्धारण के लिए इसी समय को आधार माना जाएगा।
इसके बाद 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण चलेगा। इस दौरान जनगणना के दौरान दर्ज की गई जानकारी की समीक्षा और आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि अंतिम आंकड़ों को अधिक सटीक बनाया जा सके।
बर्फीले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों को मौजूदा कार्यक्रम से अलग रखा गया है। ऊंचाई वाले इलाकों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और आवागमन की चुनौती को देखते हुए इन क्षेत्रों में जनगणना के लिए अलग समय-सारिणी जारी की जाएगी।
सरकार की ओर से जारी इस कार्यक्रम के बाद उत्तराखंड में जनगणना की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। घर-घर जाकर गणना, सेल्फ एन्यूमरेशन और पुनरीक्षण के लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिम्मेदारियां दी जाएंगी। नई प्रक्रिया के तहत डिजिटल माध्यम से स्वयं जानकारी उपलब्ध कराने का विकल्प भी नागरिकों के लिए जनगणना को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

