हिमाचल प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य चुनाव आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के साथ-साथ शहरी निकायों के चुनाव का ऐलान कर दिया है। इसके तहत जहां धर्मशाला, पालमपुर, सोलन और मंडी में नगर निगम चुनाव होंगे, वहीं करीब 3600 पंचायतों में भी “छोटी सरकार” के गठन के लिए मतदान कराया जाएगा। इसके अलावा 51 शहरी निकायों में चुनाव होंगे, जिनमें 4 नगर निगम और 25 नगर परिषद शामिल हैं।

चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, जिससे प्रशासनिक गतिविधियों पर तुरंत असर पड़ा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी मतगणना की तारीख घोषित नहीं की है। आयोग का कहना है कि पंचायत चुनावों की पूरी घोषणा होने के बाद संभव है कि निकाय, नगर निगम और पंचायतों के परिणाम एक साथ घोषित किए जाएं।
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रदेश में चुनाव हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होते रहे हैं और इस बार भी इसी तरह के आयोजन की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश सरकार और पुलिस प्रशासन को दे दिए गए हैं, ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित रहे।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नगर निगमों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर होंगे, जबकि अन्य निकायों में यह व्यवस्था अलग हो सकती है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सख्ती भी बरती जाएगी मतदान से 48 घंटे पहले और मतगणना के दिन शराब के ठेके बंद रहेंगे।
खर्च सीमा भी तय कर दी गई है। नगर निगम के उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख रुपये, नगर परिषद के उम्मीदवार 75 हजार रुपये और नगर पंचायत के प्रत्याशी 50 हजार रुपये तक ही चुनाव खर्च कर सकेंगे।
नामांकन प्रक्रिया 29 और 30 अप्रैल के साथ 2 मई तक चलेगी। 4 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 6 मई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसी दिन चुनाव चिन्ह भी आवंटित किए जाएंगे। 29 अप्रैल को मतदान केंद्रों की सूची जारी कर दी जाएगी।
मतदान 17 मई को सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक कराया जाएगा। इस चुनाव में कुल 1,80,963 पुरुष और 1,79,882 महिला मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगी, जबकि 1808 मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। मतदाता ‘सारथी’ ऐप के माध्यम से अपना नाम और मतदान से जुड़ी जानकारी भी आसानी से देख सकेंगे।
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में यह चुनाव न केवल स्थानीय शासन के गठन के लिए अहम है, बल्कि राज्य की आगामी राजनीति की दिशा तय करने वाला भी साबित हो सकता है।

