मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में लागू की गई एमएसएमई नीति-2023 उत्तराखंड में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने का काम कर रही है। इस नीति का विशेष फोकस राज्य के पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने पर है। सरकार का उद्देश्य पहाड़ों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना, स्थानीय संसाधनों का उपयोग करना और रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करना है।
वर्ष 2015 की पुरानी नीति के स्थान पर लागू की गई नई एमएसएमई नीति में पर्वतीय क्षेत्रों के उद्यमियों को कई तरह की आर्थिक सुविधाएं और प्रोत्साहन दिए गए हैं। इसके तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों के लिए ₹20 लाख से लेकर ₹4 करोड़ तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इससे पहाड़ी जिलों में नए उद्योग स्थापित करने के इच्छुक युवाओं और उद्यमियों को शुरुआती निवेश में राहत मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय कच्चे माल के इस्तेमाल पर अतिरिक्त लाभ
नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय संसाधनों और कच्चे माल को बढ़ावा देना है। यदि किसी उद्योग में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है, तो संबंधित उद्यमी को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाने के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक और कृषि आधारित संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
सरकार का मानना है कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से गांवों और छोटे कस्बों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम के अवसर मिल सकेंगे और उन्हें रोजगार की तलाश में मैदानी क्षेत्रों या दूसरे राज्यों की ओर जाने की जरूरत कम होगी।
स्टाम्प शुल्क में भी बड़ी राहत
एमएसएमई नीति-2023 के तहत उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को स्टाम्प शुल्क में 100 प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान भी किया गया है। इससे उद्योग लगाने के शुरुआती खर्च को कम करने में मदद मिलेगी। सरकार की कोशिश है कि निवेशकों को अनुकूल माहौल मिले और पर्वतीय क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की प्रक्रिया अधिक आकर्षक बने।
इसके साथ ही जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट (ZED) से जुड़े प्रोत्साहनों और पुरस्कारों के माध्यम से उद्योगों में गुणवत्ता तथा पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। इससे उत्तराखंड के स्थानीय उद्योगों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने और बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पलायन रोकने पर सरकार का जोर
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से लंबे समय से रोजगार के लिए होने वाला पलायन एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में एमएसएमई नीति-2023 को पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उद्योगों के साथ छोटे व्यवसाय, स्थानीय उत्पाद, कृषि आधारित गतिविधियां और अन्य स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य पर्वतीय क्षेत्रों को केवल पर्यटन तक सीमित रखने के बजाय वहां उद्योग, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना है। सब्सिडी, स्टाम्प शुल्क में छूट और स्थानीय कच्चे माल के इस्तेमाल पर अतिरिक्त प्रोत्साहन जैसे प्रावधान इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

