September 1, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने साइबर फ्रॉड पर कसा शिकंजा, बैंकों को दिए सख्त निर्देश; पीड़ितों की रकम लौटाने पर जोर

देहरादून। साइबर एवं वित्तीय फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम और लंबित मामलों के जल्द निस्तारण को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में पुलिस विभाग और बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई, पीड़ितों को राहत और पुलिस-बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पिछले 3-4 वर्षों में साइबर एवं वित्तीय अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में बैंकों के साथ होने वाली बैठकों में साइबर फ्रॉड को स्थायी एजेंडा बनाया जाए। मामलों की नियमित समीक्षा के साथ प्रभावी कार्रवाई और लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने साइबर एवं वित्तीय फ्रॉड की रोकथाम के लिए पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर सामंजस्य तथा त्वरित सूचना साझा करने पर जोर दिया। बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराधों से जुड़े मामलों में नियमित रूप से प्रशिक्षण और सेंसिटाइजेशन देने के निर्देश भी दिए गए।

होल्ड रकम की जानकारी पीड़ितों को देने पर जोर

मुख्य सचिव ने साइबर फ्रॉड के मामलों में होल्ड की गई धनराशि को रेस्टोरेबल प्रक्रिया में लाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित पीड़ित को इसकी जानकारी सक्रिय रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर अपनी धनराशि की बहाली के लिए आवेदन कर सके।

इसके अलावा बैंकों में ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल (GRM) को प्रभावी बनाने और शिकायतों का तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि बैंक भी ऐसे मामलों का स्वतः संज्ञान लेकर पीड़ितों के हित में जरूरी कार्रवाई करें।

म्यूल अकाउंट्स के खिलाफ चलेगा विशेष अभियान

बैठक में साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट्स की पहचान और रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। पुलिस और बैंकों को आपसी समन्वय से ऐसे खातों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकों में साइबर एवं वित्तीय फ्रॉड से जुड़े मामलों को नियमित एजेंडा में शामिल करने को कहा। साथ ही लंबित मामलों की समीक्षा कर उनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि साइबर और वित्तीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस विभाग, बैंकिंग संस्थानों और अन्य संबंधित विभागों के बीच लगातार समन्वय, सूचना-साझाकरण और जवाबदेही जरूरी है। समन्वित प्रयासों से ही साइबर फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण के साथ पीड़ितों को जल्द राहत और उनकी धनराशि की बहाली सुनिश्चित की जा सकेगी।

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट सहित प्रदेश के विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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