Chhath Puja2022 : बिहार में छठ पूजा महापर्व शुरू, पहले दिन नहाए खाए से होगी शुरुआत, हरिद्वार में भी हुआ आयोजन, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी हुईं शामिल - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
June 26, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड धर्म/अध्यात्म

Chhath Puja2022 : बिहार में छठ पूजा महापर्व शुरू, पहले दिन नहाए खाए से होगी शुरुआत, हरिद्वार में भी हुआ आयोजन, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी हुईं शामिल

दीपावली के बाद मनाया जाने वाला महापर्व छठ पूजा आज से शुरू हो गया है । पहले दिन नहाए खाए से इस महापर्व की शुरुआत होती है। ‌ बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत तमाम जगहों पर छठ महापर्व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसके साथ विदेश में बसे बिहार के लोग भी इस महापर्व को धूमधाम के साथ मनाते हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार में भी छठ महापर्व की शुरुआत की गई। ‌हरिद्वार में पूर्वांचल जन जागृति संस्था द्वारा छठ पूजा कार्यक्रम की शुरुआत की गई। जिसमें विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रही। वहीं, हरिद्वार शहर विधायक मदन कौशिक, रानीपुर विधायक आदेश चौहान और किच्छा से पूर्व विधायक राजेश शुक्ला भी मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर बिहार में छठ पूजा बनाने को लेकर उत्साह छाया हुआ है। बता दें कि छठ पूजा दीपावली के बाद से छठ पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। यह व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है इसमें व्रती महिलाएं लगातार 36 घंटे निर्जला व्रत रखती हैं। सूर्य देव की उपासना और छठ मैया की पूजा करते संतान की प्राप्ति और उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं। कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को पहले दिन नहाए खाए किया जाता है। छठ पर्व की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है। नहाए खाए के दिन महिलाएं घर की साफ-सफाई करती हैं। घर में चने की दाल, लौकी की सब्जी और भात प्रसाद के रूप में बनता है। इस भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। 4 दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ के बारे में अब देश ही नहीं बल्कि विदेश के लोग भी जानते हैं। आधुनिकता की दौड़ में शायद यही वो त्योहार है जो जरा भी नहीं बदला, शायद इसलिए ही इसे महापर्व कहा जाता है। इस पर्व में भगवान सूर्य के साथ छठी माई की भी पूजा-उपासना विधि-विधान के साथ की जाती है। छठी माई को सूर्यदेव की बहन है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छठ का त्योहार व्रत संतान प्राप्ति करने की कामना, कुशलता,सुख-समृद्धि और उसकी दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है। चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय से इस पर्व की शुरुआत हो जाती है और षष्ठी तिथि को छठ व्रत की पूजा, व्रत और डूबते हुए सूरज को अर्घ्य के बाद अगले दिन सप्तमी को उगते सूर्य को जल देकर प्रणाम करने के बाद व्रत का समापन किया जाता है। इस साल छठ पूजा का महापर्व 28 अक्टूबर 2022 से शुरू हो रहा है। कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस साल ये पर्व 28 अक्टूबर से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक चलेगा। इस महापर्व की शुरुआत आज नहाय खाय होगी। 29 अक्टूबर को खरना होगा। 30 अक्टूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 31 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार छठ देवी भगवान ब्रह्माजी की मानस पुत्री और सूर्यदेव की बहन हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टि रचने के लिए स्वयं को दो भागों में बांट दिया,जिसमें दाहिने भाग में पुरुष और बाएं भाग में प्रकृति का रूप सामने आया। सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आपको छह भागों में विभाजित किया । इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी या देवसेना के रूप में जाना जाता है। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इनका एक नाम षष्ठी है, जिसे छठी मैया के नाम से जाना जाता है। शिशु के जन्म के छठे दिन भी इन्हीं की पूजा की जाती है। इनकी उपासना करने से बच्चे को स्वास्थ्य,सफलता और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि पर षष्ठी तिथि को इनकी पूजा की जाती है।

Related posts

Rishabh pant airlift Mumbai : बीसीसीआई ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए टीम इंडिया के खिलाड़ी ऋषभ पंत को एअरलिफ्ट करके मुंबई भेजा,

admin

प्रधानमंत्री मोदी की कल देहरादून में होने वाली जनसभा के आसपास क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज रहेंगे बंद

admin

1 फरवरी, रविवार का पंचांग और राशिफल

admin

Leave a Comment