महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का प्लेन बुधवार सुबह बारामती में क्रैश हो गया। इस क्रैश में अजित पवार समेत सभी पांच लोगों की मौत हो गई है। अजित पवार का अंतिम संस्कार कल सुबह यानी 29 जनवरी गुरूवार को 11 बजे विद्या प्रतिष्ठान, विद्यानगरी चौक, बारामती में होगा, अजीत पवार का पार्थिव शरीर शाम 5 बजे से अंतिम दर्शन लिए रखा जाएगा और अंतिम यात्रा कल सुबह 9 बजे निकलेगी। वहीं PM मोदी ने शरद पवार से फोन पर बात की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, राज्यसभा नेता विपक्ष मल्लिकार्जिन खरगे ने अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। अपने साथी अजीत पवार के निधन पर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह महाराष्ट्र के लिए एक दुखद दिन है। यह हमारे और पूरे महाराष्ट्र के लिए एक दर्दनाक घटना है। अजीत दादा अपनी बात के पक्के थे। जब मैं सीएम था और वह डिप्टी सीएम थे, तो हमने एक टीम के तौर पर काम किया था।
दादा’ के नाम से मशहूर थे अजित पवार
महाराष्ट्र की सियासत में ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार को सत्ता और संगठन दोनों में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता के तौर पर जाना जाता था। उन्होंने अपने चाचा और एनसीपी प्रमुख शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे खुद को राज्य की राजनीति के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया।
कब हुआ था अजित पवार का जन्म
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ था। वह शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे। उनके पिता प्रसिद्ध ‘राजकमल स्टूडियो’ में काम करते थे। अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई और उनके दो बच्चे हैं, जिनका नाम पार्थ पवार और जय पवार है।
अजित पवार की पढ़ाई
उन्होंने बारामती के महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और पूरी तरह राजनीति की ओर रुख किया।
अजित पवार की राजनीति में एंट्री
अजित पवार ने साल 1982 में, महज 20 साल की उम्र में, राजनीति में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड का चुनाव लड़ा। इसके बाद 1991 में वह पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और करीब 16 साल तक इस पद पर रहे।
अजित पवार का पहला लोकसभा चुनाव
उसी साल 1991 में उन्होंने बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीता, लेकिन बाद में यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी। इसके बाद शरद पवार केंद्र की राजनीति में सक्रिय हुए और अजित पवार ने महाराष्ट्र की सियासत की कमान संभालनी शुरू की।
अजित पवार का पहला विधानसभा चुनाव
अजित पवार पहली बार 1995 में बारामती विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज की। बारामती पवार परिवार का गढ़ माना जाता है और यहां से उनका गहरा जुड़ाव रहा।

