हिमाचल प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण अनुकूल, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। राज्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें और 100 हाइड्रोजन बसें खरीदी जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा भी मिल सकेगी। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को सोलन जिले के क्यारीघाट से हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इन बसों के शामिल होने के बाद एचआरटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या बढ़कर 500 हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को हरित ऊर्जा आधारित परिवहन का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। नई इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और प्रदूषण मुक्त सफर उपलब्ध कराएंगी। साथ ही इनके संचालन से डीजल पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग से एचआरटीसी के संचालन खर्च में भी बड़ी बचत होगी, जिससे निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। बसों के निर्बाध संचालन के लिए प्रदेश के विभिन्न डिपो और प्रमुख बस अड्डों पर आधुनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित किए गए हैं। आने वाले समय में इस नेटवर्क का और विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘हिमबस प्लस कार्ड’ भी लॉन्च किया। इस कार्ड के माध्यम से यात्रियों को पूरी तरह कैशलेस और डिजिटल यात्रा की सुविधा मिलेगी। नियमित यात्रियों को किराए में 5 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को 15 प्रतिशत रियायत का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा एचआरटीसी सेवाओं के अधिक उपयोग पर यात्रियों को प्रति माह अधिकतम 2,000 रुपये तक कैशबैक भी मिलेगा।
सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन बसों के विस्तार से न केवल सार्वजनिक परिवहन अधिक आकर्षक बनेगा, बल्कि निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी। इससे सड़कों पर यातायात दबाव घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार आने वाले वर्षों में परिवहन क्षेत्र में हरित तकनीकों के उपयोग को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि हिमाचल प्रदेश स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का राष्ट्रीय उदाहरण बन सके।

