उत्तराखंड सरकार ने राज्य को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन, धार्मिक स्थलों के सुनियोजित विकास और साहसिक पर्यटन को नई पहचान देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 514 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी बजट को मंजूरी दी गई है। मंगलवार को देहरादून स्थित पर्यटन मुख्यालय में आयोजित उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) की 24वीं बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्तुत सभी 20 एजेंडों को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में राज्य के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की व्यापक योजना पर मुहर लगी। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को केवल तीर्थाटन तक सीमित न रखकर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और एडवेंचर पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं, बेहतर प्रबंधन और स्थानीय सहभागिता पर विशेष जोर दिया जाएगा।
राज्य के प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों के लिए विशेष डेस्टिनेशन प्लान तैयार किया जाएगा। रुद्रप्रयाग जिले स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर, जहां पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, उसे विश्वस्तरीय डेस्टिनेशन वेडिंग स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं, नैनीताल जिले के कैंची धाम में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्किंग, विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। कार्तिक स्वामी धाम में ट्रेकिंग मार्गों के विकास और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने की भी योजना स्वीकृत की गई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पलायन रोकने के लिए सरकार ने होम-स्टे योजना में बड़ा बदलाव किया है। ट्रैकिंग-ट्रैक्शन होम-स्टे योजना के तहत नए निर्माण पर मिलने वाला अनुदान अब 60 हजार रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया है। इसके अलावा कमरों के रखरखाव और मरम्मत के लिए अनुदान राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी।
साहसिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए 3,121 युवाओं को विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इनमें माउंटेनियरिंग, स्कीइंग, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और हाई ऑल्टिट्यूड गाइड जैसे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को पर्यटन उद्योग में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए आगामी वर्ष में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की भी योजना बनाई गई है। कौसानी पहली बार एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ATOAI) के नेशनल कन्वेंशन की मेजबानी करेगा, जिसमें देश-विदेश से 500 से अधिक पर्यटन विशेषज्ञ भाग लेंगे। नवंबर 2026 में देहरादून में उत्तराखंड इंटरनेशनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन होगा। साथ ही स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ग्लोबल फूड फेस्टिवल भी आयोजित किया जाएगा।
साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए टोंस नदी में इंटरनेशनल रिवर राफ्टिंग फेस्टिवल आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त अल्ट्रा मैराथन, विंटर कार्निवल, पैराग्लाइडिंग फेस्टिवल समेत 18 प्रमुख एडवेंचर आयोजनों का वार्षिक कैलेंडर भी स्वीकृत किया गया है।
पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रिवर राफ्टिंग और कयाकिंग नियमों में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। अब सभी राफ्टिंग गाइड्स के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। लाइफ जैकेट और हेलमेट के उपयोग, आयु सीमा निर्धारण तथा दुर्घटना या दुराचार की स्थिति में लाइसेंस निरस्तीकरण जैसे प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाया गया है।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड प्रकृति, अध्यात्म और साहसिक पर्यटन का अद्वितीय संगम है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत बजट और नई योजनाएं राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देंगी। साथ ही विभागीय ढांचे को मजबूत करने और रिक्त पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेज करने पर भी विचार किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन फैसलों से उत्तराखंड विश्व के अग्रणी एडवेंचर और आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

