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August 18, 2026
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राष्ट्रीय

केंद्र सरकार का बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण फैसला, अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप नहीं मिलेगा

केंद्र सरकार ने आम जनता खासकर बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए खांसी की सिरप (कफ सिरप) की बिक्री पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप खरीदना असंभव हो गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम (ड्रग्स रूल्स), 1945 में संशोधन कर दिया है। राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) के माध्यम से यह बदलाव अधिसूचित किया गया है।

मुख्य बदलाव:

– औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘क’ या ‘K’ की प्रविष्टि संख्या 13 से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया गया है।
– 1000 से कम आबादी वाले छोटे गांवों में बिना लाइसेंस के कफ सिरप बेचने की छूट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
– अब खांसी की सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों से ही बिक्री होगी।
– डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) अनिवार्य कर दिया गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

मंत्रालय के अनुसार, यह कदम खांसी की सिरप की अनियंत्रित बिक्री, दुरुपयोग और गुणवत्ता संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए उठाया गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से यह संशोधन किया गया है।

संशोधन दिसंबर 2025 में अधिसूचित किया गया था और अब पूरे देश में लागू है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी दवा निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि नए नियमों का सख्ती से पालन करें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला दवाओं के जिम्मेदार वितरण को बढ़ावा देने और पूरे देश में नियामक मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

इसे लेकर सरकार का कहना है कि कफ सिरप के दुरुपयोग को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब कफ सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के माध्यम से और वैध चिकित्सकीय सलाह के तहत ही उपलब्ध होगा।

आमतौर पर कफ सिरप में ऐसी औषधियां शामिल होती हैं जो ड्रग्स रूल्स की अनुसूची H और H1 के अंतर्गत आती हैं। इन दवाओं के लिए डॉक्टर के पर्चे और लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से वितरण की व्यवस्था पहले से लागू है। हालांकि अनुसूची K के तहत एक विशेष छूट दी गई थी, जिसके कारण एक हजार से कम आबादी वाले गांवों में घरेलू उपचार के रूप में कफ सिरप उपलब्ध कराया जा सकता था।

सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में कफ सिरप के दुरुपयोग और उससे जुड़े मामलों को देखते हुए इस छूट को जारी रखना उचित नहीं था। इसलिए अब छोटे और दूरदराज के गांवों में भी कफ सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जाएगा।

इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि मरीजों को दवा के सही उपयोग, उचित खुराक, सेवन की अवधि, सावधानियों और संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी मिल सके। साथ ही उन्हें यह भी बताया जा सकेगा कि किन परिस्थितियों में दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और किन आयु वर्गों के लिए विशेष सावधानी आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ सिरप का सेवन कई बार स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। नई व्यवस्था फार्मेसियों की जवाबदेही भी बढ़ाएगी और बिना वैध पर्चे के कफ सिरप की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट पहले केवल एक हजार से कम आबादी वाले गांवों तक सीमित थी। शहरी क्षेत्रों और ऑनलाइन माध्यम से कफ सिरप की बिक्री के लिए पहले भी वैध चिकित्सकीय पर्चा और पंजीकृत फार्मेसी के माध्यम से वितरण अनिवार्य था।

नए संशोधन के बाद अब देशभर में कफ सिरप की उपलब्धता और वितरण पर अधिक प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।

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