बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर बवाल जारी है। हालांकि, सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा मंज़ूर नहीं किया है। सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं और मामले में बरेली के कमिश्नर को जांच अधिकारी बनाया गया है। इस बीच अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी जान के खतरे की आशंका भी जताई है। बता दें कि अलंकार अग्निहोत्री ने UGC और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया जिसके बाद से सियासत गरमा गई है।विभागीय जांच के आदेश जारी
जानकारी के मुताबिक, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। अलंकार अग्निहोत्री को निलंबन अवधि में केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। वह जांच पूरी होने तक शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। राज्य के विशेष सचिव ने ये आदेश जारी किया है।

क्या है पूरा विवाद?
अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अचानक इस्तीफा दे दिया और आरोप लगाया कि सरकार शंकराचार्य के साथ अच्छा बर्ताव नहीं कर रही है। साथ ही UCG के नियमों से सवर्णों के साथ अन्याय हो रहा है। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी जान को भी खतरा होने की आशंका जता दी। आरोप लगाने के कुछ ही घंटे में अलंकार अग्निहोत्री ने अपना आवास देर रात ही खाली कर दिया। इस मामले पर सपा और कांग्रेस ने यूपी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है तो स्वानी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी अलंकार अग्निहोत्री को धर्म के क्षेत्र में बड़ा पद देने का ऑफर दिया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिला बड़ा समर्थन
दूसरी ओर, प्रयागराज के माघ मेले में धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अब शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का समर्थन मिला है। जबलपुर के एक कार्यक्रम में पहुंचे स्वामी सदानंद सरस्वती ने मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई को लेकर नाराजगी जताई हैं। शारदा पीठ के शंकराचार्य ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन मिला है।

