देश में बीते कुछ वर्षों के दौरान पेंशन और बीमा कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में दी गई।

वित्तीय समावेशन को गहराने पर सरकार का जोर
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि बीमा और पेंशन क्षेत्र के नियामक निकाय-भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कई अहम सुधार किए हैं।
बहु-स्तरीय पेंशन व्यवस्था से बढ़ा दायरा
सर्वेक्षण के अनुसार, पीएफआरडीए ने एक मजबूत और समावेशी पेंशन व्यवस्था की नींव रखी है, जो उपभोक्ताओं को कई विकल्प प्रदान करती है और बड़ी आबादी को अपने दायरे में लाती है। देश की पेंशन प्रणाली बहु-स्तरीय है, जिसमें मार्केट से जुड़ा नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), 2025 में शुरू की गई सरकार समर्थित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएल) और व्यापक कवरेज के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) तथा अटल पेंशन योजना (एपीवाई) शामिल हैं।
एनपीएस और एपीवाई में तेज वृद्धि
31 दिसंबर 2025 तक एनपीएस से जुड़े ग्राहकों की संख्या 211.7 लाख पहुंच गई, जबकि इसके तहत प्रबंधित परिसंपत्तियों (एयूएम) का मूल्य 16.1 लाख करोड़ रुपए रहा। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि वित्त वर्ष 15 से वित्त वर्ष 25 के बीच एनपीएस ग्राहकों में 9.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई, जबकि एयूएम में 37.3% की तेज बढ़ोतरी हुई। इसी तरह, 2016 में शुरू हुई अटल पेंशन योजना के तहत ग्राहकों की संख्या में 43.7% की मजबूत सीएजीआर से वृद्धि हुई, जबकि एयूएम में 64.5% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई।
‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ की दिशा में कदम
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारतीय बीमा क्षेत्र ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के विजन से प्रेरित होकर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आईआरडीएआई ने सिद्धांत-आधारित नियामक ढांचे को अपनाया है, जिससे नियमों को मजबूत करने के साथ-साथ अनुपालन का बोझ कम हुआ है और बीमा कंपनियों को नवाचार के लिए अधिक लचीलापन मिला है।
स्वास्थ्य बीमा बना गैर-जीवन क्षेत्र का सबसे बड़ा सेगमेंट
सर्वेक्षण के मुताबिक, गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव साफ दिखाई दे रहे हैं। स्वास्थ्य बीमा, जो कुल घरेलू प्रीमियम का 41% हिस्सा रखता है, ने मोटर बीमा को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है। वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में नेट इनकर्ड क्लेम 70% से अधिक बढ़कर 1.9 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया, जिसमें स्वास्थ्य और मोटर बीमा की प्रमुख भूमिका रही।
जीवन बीमा का दबदबा बरकरार
सर्वेक्षण में बताया गया है कि जीवन बीमा खंड बीमा क्षेत्र में अब भी प्रमुख बना हुआ है। इसके पास कुल एयूएम का 91% हिस्सा है और कुल प्रीमियम आय में इसका योगदान लगभग 75% है। वित्त वर्ष 2025 में जीवन बीमा कंपनियों ने कुल 6.3 लाख करोड़ रुपए के लाभ का भुगतान किया।
जीएसटी छूट और सुधारों से बीमा होगा सस्ता
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि जीवन बीमा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी में छूट से पॉलिसीधारकों को बड़ी राहत मिली है और बीमा सेवाएं अधिक किफायती हुई हैं। ‘सबका बीमा, सबकी सुरक्षा एक्ट, 2025’ के लागू होने से बीमा क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित सुधारों को गति मिलेगी। इसके तहत एफडीआई सीमा को 100% तक बढ़ाने सहित अन्य संशोधनों से कारोबार में आसानी बढ़ेगी और बीमा क्षेत्र के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा।

