करीब 40 दिनों से जारी तनावपूर्ण संघर्ष के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बन गई। यह फैसला ऐसे समय में आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार तय समयसीमा तक समझौता न होने पर ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रहे थे। हालांकि, समयसीमा पूरी होने से पहले ही हालात बदले और दोनों पक्षों ने अस्थायी रूप से संघर्ष रोकने पर सहमति जताई।
जानकारी के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुआ यह टकराव कई चरणों में बढ़ता गया और पिछले कुछ दिनों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। अमेरिका ने ईरान पर क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने और तेल आपूर्ति प्रभावित करने के आरोप लगाए थे, जबकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को उकसावे की कार्रवाई बताया था। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी टकराव बढ़ गया था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कूटनीतिक हलकों में चिंता गहरा गई थी।
रविवार को ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि अगर मंगलवार रात 8 बजे (अमेरिकी समयानुसार) तक ईरान समझौते के लिए आगे नहीं आया, तो अमेरिकी सेना निर्णायक कार्रवाई करेगी। उन्होंने संकेत दिए थे कि ईरान के ऊर्जा संयंत्रों, परिवहन ढांचे और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए थे और माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है।
हालांकि, समयसीमा खत्म होने से पहले कूटनीतिक स्तर पर तेजी से बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान पाकिस्तान की ओर से भी संदेशों के आदान-प्रदान में भूमिका रही, जिसके बाद माहौल नरम पड़ा। इसके बाद ट्रंप ने खुद घोषणा करते हुए कहा कि दोनों देशों ने दो सप्ताह के लिए अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बना ली है। उन्होंने इसे तनाव कम करने और आगे की बातचीत के लिए अवसर बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह विराम स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम हो सकता है, बशर्ते ईरान शर्तों का पालन करे। वहीं ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने और बातचीत जारी रखने के पक्ष में है, लेकिन उसने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते में उसकी संप्रभुता और सुरक्षा हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
पिछले दो-तीन दिनों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। पहले कड़े बयान, फिर सैन्य तैयारी और उसके बाद अचानक सीजफायर की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चौंका दिया। कई देशों ने इस अस्थायी युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विराम स्थायी शांति की गारंटी नहीं है, लेकिन इससे दोनों पक्षों को बातचीत का समय मिल सकता है।
इस बीच वैश्विक बाजारों में भी इस खबर का असर देखने को मिला। तेल की कीमतों में अस्थिरता कम हुई और निवेशकों ने राहत की सांस ली। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। यदि वार्ता विफल होती है, तो तनाव फिर बढ़ सकता है।
फिलहाल, दो सप्ताह का यह अस्थायी युद्धविराम दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का मौका माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि इस अवधि में कूटनीतिक बातचीत कितनी आगे बढ़ती है और क्या यह विराम स्थायी समझौते में बदल पाता है या नहीं ।

