चारधाम यात्रा की तैयारियां जहां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं, वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक संबंधी प्रस्ताव ने सियासी और धार्मिक बहस को तेज कर दिया है। इस मुद्दे पर अब उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
शादाब शम्स ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल का मूल उद्देश्य आस्था और श्रद्धा होता है। जिन लोगों की आस्था सनातन धर्म के तीर्थ स्थलों से नहीं जुड़ी है, उनके वहां जाने से न तो यात्रा का उद्देश्य पूरा होता है और न ही समाज को कोई सकारात्मक संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक टकराव की स्थिति भी बन सकती है, जो किसी के हित में नहीं है।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि मौजूदा समय में देश के खिलाफ लगातार साजिशें हो रही हैं। ऐसे तत्व कभी नहीं चाहेंगे कि चारधाम यात्रा जैसे बड़े और शांतिपूर्ण आयोजन सफल हों। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यात्रा के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसका दोष गैर हिंदुओं पर मढ़ा जा सकता है, जिससे सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
शादाब शम्स ने साफ किया कि गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक का फैसला किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की शांति, सुरक्षा और आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए जरूरी कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और दूरगामी परिणामों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।
बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति के प्रस्ताव के बाद यह मामला अब धार्मिक से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार और प्रशासन क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

