नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले रविवार को संसद भवन की एनेक्सी इमारत में केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, शिवसेना, जदयू, टीडीपी समेत लगभग 40 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने और विभिन्न दलों की प्राथमिकताओं व मुद्दों पर चर्चा करना था।
बैठक के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने उस समय विरोध जताया, जब सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के एक गुट को भी बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया। विपक्ष का कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक इस गुट को अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता नहीं दी है, ऐसे में उन्हें सर्वदलीय बैठक में बुलाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों ने बैठक के बीच सांकेतिक वॉकआउट भी किया।
बैठक में विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, मणिपुर की स्थिति, पहलगाम आतंकी हमले, विदेश नीति, महाराष्ट्र में भाषा विवाद, ऑपरेशन सिंदूर और कई अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग रखी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार से इन विषयों पर जवाब देने की भी मांग की।
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि चर्चा सकारात्मक माहौल में हुई और सभी दलों ने अपनी-अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित न हो, यह सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्ष से भी रचनात्मक सहयोग की अपील की।
वहीं, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार चाहती है कि सदन में अधिकतम कामकाज हो और जनहित से जुड़े विधेयकों पर सार्थक चर्चा हो। उन्होंने बताया कि सभी दलों के सुझावों को गंभीरता से लिया गया है।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान दोनों सदनों की कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र के पहले दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधि (विशेष प्रावधान) संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकते हैं। सरकार और विपक्ष के तेवरों को देखते हुए इस बार का मानसून सत्र भी काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं।

