September 6, 2026
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उत्तराखंड

2017 के बाद बदली देवभूमि की तस्वीर, चारधाम से मानसखंड तक आस्था के नए रिकॉर्ड



उत्तराखंड में वर्ष 2017 के बाद धार्मिक पर्यटन और तीर्थयात्रा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। चारधाम यात्रा से लेकर कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों तक श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने देवभूमि को देश-दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में स्थापित किया है। सरकार का दावा है कि बेहतर बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार से उत्तराखंड में तीर्थयात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित हुई है।

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करती है। वर्ष 2017 में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा पर करीब 23 लाख तीर्थयात्री पहुंचे थे। इसके बाद यात्रा सुविधाओं और कनेक्टिविटी में लगातार सुधार के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2023 और 2025 में चारधाम यात्रा का आंकड़ा करीब 50 लाख से बढ़कर 56 लाख के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया।

केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों से लेकर बद्रीनाथ के मास्टर प्लान तक कई बड़े प्रोजेक्टों पर काम किया गया है। इसके साथ ही ऑल वेदर रोड और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को भी उत्तराखंड के धार्मिक और आर्थिक विकास के लिए अहम माना जा रहा है।

वहीं, कुमाऊं क्षेत्र में मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार देवभूमि की पवित्रता, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद केदारनाथ पुनर्निर्माण, बद्रीनाथ मास्टर प्लान और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों को गति मिली है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार का लक्ष्य केवल तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि धार्मिक पर्यटन को स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बनाना भी है। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि आस्था और पर्यटन के इस विस्तार से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल सकती है।

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