भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनावों से पहले अपने संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और 24 राज्यों में सह-प्रभारियों की नियुक्ति कर दी। नई सूची में कई प्रमुख नेताओं को अहम राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में हुए बदलावों को लेकर है। पार्टी की इस नई व्यवस्था को आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने और राज्यों में राजनीतिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
नई सूची के मुताबिक संजय भाटिया को राजस्थान का प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ कविता पाटीदार और कुलजीत चहल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले राजस्थान की जिम्मेदारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के पास थी। वहीं मध्य प्रदेश में बिप्लब कुमार देब को नया प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ रेखा वर्मा सह-प्रभारी होंगी। मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी पहले डॉ. महेंद्र सिंह संभाल रहे थे।
भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेताओं को भी दो-दो राज्यों की जिम्मेदारी देकर संगठनात्मक समीकरण को नया रूप दिया है। स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है, जबकि राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड की जिम्मेदारी मिली है। हरीश द्विवेदी को बिहार के साथ कर्नाटक का भी प्रभारी बनाया गया है। सतीश पूनिया को पंजाब के साथ जम्मू-कश्मीर और सुनील बंसल को तेलंगाना के साथ पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह कई राज्यों में एक ही वरिष्ठ नेता को एक से अधिक संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े प्रभारी बने रहेंगे। उनके साथ चार सह-प्रभारी—जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा—नियुक्त किए गए हैं। भाजपा ने गुजरात में तरुण चुघ और पंजाब में सतीश पूनिया को भी प्रभारी बनाए रखा है। इन राज्यों के लिए पहले ही प्रभारी नियुक्त किए जा चुके थे और अब जारी की गई विस्तृत सूची में भी इनके नाम शामिल किए गए हैं।
संगठनात्मक फेरबदल का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक तैयारियों, बूथ स्तर की सक्रियता, चुनावी रणनीति और स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय की जिम्मेदारी नए प्रभारी और सह-प्रभारी संभालेंगे। उत्तराखंड में राम माधव को प्रभारी बनाकर अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज को सह-प्रभारी बनाया गया है, जबकि हिमाचल प्रदेश में श्रीकांत शर्मा को प्रभारी और दर्शाना सिंह को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।
नई सूची में महाराष्ट्र की जिम्मेदारी बैजयंत जय पांडा को दी गई है। उनके साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट तानावडे और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी होंगे। दिल्ली में विनय सहस्रबुद्धे को प्रभारी बनाया गया है। वहीं झारखंड में गजेंद्र पटेल, ओडिशा में डी. पुरंदेश्वरी, केरल में एम. नागराजा और मेघालय में कनाद पुरकायस्थ को जिम्मेदारी मिली है।
भाजपा ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सह-प्रभारी नियुक्त नहीं किए हैं। इनमें अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप शामिल हैं। इसके अलावा मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम और त्रिपुरा में भी केवल प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। यानी इन क्षेत्रों में संगठनात्मक जिम्मेदारी मुख्य रूप से नियुक्त प्रभारी के स्तर पर ही रहेगी।
कुल मिलाकर भाजपा की नई सूची में केवल चेहरे बदलने तक सीमित फेरबदल नहीं दिखता, बल्कि कई महत्वपूर्ण राज्यों के लिए जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया गया है। खास तौर पर 2027 में चुनाव वाले राज्यों में संगठन की कमान तय करने से आने वाले महीनों में पार्टी की राज्यवार रणनीति, चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक गतिविधियों पर इसका असर दिखाई दे सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा घोषित इन नियुक्तियों को पार्टी के व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।

