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October 13, 2026
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राष्ट्रीय

पेन किलर लेने वालों सावधान! दर्द से राहत की दवा कहीं किडनी पर न डाल दे असर, सीडीएससीओ ने जारी की चेतावनी



दर्द या सामान्य संक्रमण की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना अब गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का कारण बनता जा रहा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की है। संगठन ने कहा है कि इन दवाओं का जरूरत से ज्यादा या गलत तरीके से इस्तेमाल करने से क्रानिक किडनी डिजीज (सीकेडी), किडनी खराब होने और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। खास तौर पर बिना चिकित्सकीय सलाह के लगातार दर्द निवारक दवाएं लेने और संक्रमण होने पर खुद से एंटीबायोटिक शुरू करने की आदत को लेकर चिंता जताई गई है।

सीडीएससीओ ने 21 सितंबर को जारी एक सर्कुलर में दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक के सही, सुरक्षित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल पर जोर दिया है। साथ ही दवाओं की बिक्री और प्रिस्क्रिप्शन से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी इस सर्कुलर में कहा गया है कि दवाओं का आयात, निर्माण, बिक्री और वितरण ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार नियंत्रित होता है।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि कई दवाओं को उनके संभावित जोखिम और इस्तेमाल की प्रकृति को देखते हुए ड्रग्स रूल्स, 1945 के अलग-अलग शेड्यूल में रखा गया है। इनमें शेड्यूल जी, एच, एच1 और एक्स शामिल हैं। इन दवाओं के इस्तेमाल में चिकित्सकीय निगरानी और निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी दवाएं जरूरत के मुताबिक और सही मात्रा में ही इस्तेमाल की जाएं तथा मरीज बिना चिकित्सकीय सलाह के इनका सेवन न करें।

दर्द निवारक दवाओं की बात करें तो अधिकतर नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआइडी) शेड्यूल एच के तहत आती हैं। ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 97 के अनुसार इन दवाओं को किसी पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के प्रिस्क्रिप्शन के बिना बेचा नहीं जा सकता। यानी सामान्य दर्द, शरीर में दर्द या किसी अन्य तकलीफ के लिए इन दवाओं को अपनी मर्जी से लगातार लेते रहना उचित नहीं है। सीडीएससीओ की चेतावनी का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसी दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल को रोकना है।

एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर भी संगठन ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है। अधिकतर एंटीबायोटिक दवाएं शेड्यूल एच1 में आती हैं। इन दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी दी जाती है कि डॉक्टर की सलाह के बिना इनका इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल सामान्य दर्द या हर तरह के बुखार में अपने स्तर पर करना उचित नहीं माना जाता। इन दवाओं का उपयोग डॉक्टर की सलाह और बताए गए तरीके के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

एएमआर की समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसका सीधा संबंध संक्रमण के इलाज से है। जब रोगाणुओं पर किसी दवा का असर कम या खत्म हो जाता है तो संक्रमण के इलाज में वही दवा प्रभावी नहीं रहती। इसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहा जाता है। एंटीबायोटिक का जरूरत से ज्यादा या गलत इस्तेमाल इस समस्या को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना न केवल संबंधित व्यक्ति के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, बल्कि दवाओं के प्रभाव को लेकर व्यापक स्वास्थ्य चुनौती भी खड़ी कर सकता है।


लोगों को दवाओं के इस्तेमाल में बरतनी होगी विशेष सावधानी


सीडीएससीओ ने आम लोगों से अपील की है कि दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं का मनमाने तरीके से इस्तेमाल न करें। किसी बीमारी या संक्रमण की स्थिति में पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। खास तौर पर एंटीबायोटिक को खुद से इलाज के लिए इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी गई है। डॉक्टर यदि किसी मरीज को एंटीबायोटिक लेने की सलाह देते हैं तो उसे डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीके, मात्रा और अवधि के अनुसार ही लेना चाहिए। इलाज के दौरान अपनी मर्जी से दवा बंद करना या बदलना भी उचित नहीं है।

सर्कुलर में बची हुई एंटीबायोटिक दवाओं को दोबारा इस्तेमाल नहीं करने की सलाह भी दी गई है। कई बार लोग किसी पुराने संक्रमण के दौरान बची दवा को बाद में समान लक्षण दिखाई देने पर खुद से लेना शुरू कर देते हैं। सीडीएससीओ की सलाह के मुताबिक ऐसा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि हर संक्रमण के लिए एक ही दवा प्रभावी हो, यह जरूरी नहीं है। गलत दवा लेने से इलाज प्रभावित होने के साथ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ सकता है।

दर्द निवारक दवाओं को लेकर भी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बार-बार या लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। खास तौर पर जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी बीमारी है, उन्हें दर्द निवारक दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति में दवा का चयन और उसकी मात्रा चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए।

सीडीएससीओ ने दवाओं की बिक्री और वितरण से जुड़े पक्षों को भी निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। शेड्यूल एच और एच1 जैसी श्रेणियों में आने वाली दवाओं के लिए प्रिस्क्रिप्शन संबंधी प्रावधानों का पालन जरूरी है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी दवाएं बिना उचित चिकित्सकीय सलाह के आसानी से उपलब्ध होकर अनियंत्रित तरीके से इस्तेमाल न हों।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए भी यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दोनों ही ऐसी दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक किया जाना चाहिए। सामान्य दर्द या संक्रमण के हर मामले में दवा की जरूरत एक जैसी नहीं होती। मरीज की स्थिति, बीमारी के कारण और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों के आधार पर ही दवा का इस्तेमाल तय किया जाना चाहिए।

सीडीएससीओ की चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दवाओं के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। संगठन का संदेश साफ है कि दवाएं जरूरत के मुताबिक और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही ली जाएं। खासकर एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं को सामान्य दवाओं की तरह अपनी मर्जी से लेने से बचना जरूरी है। लोगों को किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले उसके संभावित जोखिम और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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