हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल सामने आई है। पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर छह सुरंगों के निर्माण और पांगी क्षेत्र में पांच टनल बनाने की योजना से लोगों को सालभर बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, बर्फबारी और भूस्खलन के कारण प्रभावित होने वाली सड़क कनेक्टिविटी की समस्या को कम करना है।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के कई इलाके पहाड़ी और दुर्गम भूभाग में स्थित हैं। सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के कारण कई सड़कों पर यातायात बाधित हो जाता है। इसका सीधा असर स्थानीय निवासियों, मरीजों, विद्यार्थियों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ता है। ऐसे में सुरंगों का निर्माण इन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
पठानकोट-भरमौर मार्ग को मिलेगी मजबूती
पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित छह सुरंगों से पहाड़ी मार्गों पर यात्रा की कठिनाइयां कम करने में मदद मिल सकती है। सुरंगों के बनने से संवेदनशील सड़क हिस्सों पर निर्भरता घटाने और आवागमन को अधिक सुरक्षित बनाने की संभावना है। हालांकि, परियोजना की लागत, निर्माण की समयसीमा और प्रत्येक सुरंग की लंबाई जैसी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
पांगी घाटी के लिए भी अहम पहल
चंबा जिले की पांगी घाटी हिमाचल के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में गिनी जाती है। यहां सर्दियों में बर्फबारी के कारण संपर्क मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होती है। क्षेत्र के लिए प्रस्तावित पांच सुरंगों का निर्माण आगे बढ़ता है, तो स्थानीय लोगों को पूरे साल सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल सकती है।
बेहतर कनेक्टिविटी से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, 12 महीने निर्बाध यातायात का लक्ष्य सुरंगों के निर्माण, परियोजनाओं की मंजूरी और संबंधित सड़क मार्गों की स्थिति पर निर्भर करेगा। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन की तस्वीर बदल सकती है।

