Uttarakhand उत्तराखंड में छह प्रमुख रोप-वे परियोजनाओं को मंजूरी - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
February 9, 2026
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Uttarakhand उत्तराखंड में छह प्रमुख रोप-वे परियोजनाओं को मंजूरी






उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राथमिकता के आधार पर छह प्रमुख रोप-वे परियोजनाओं को चयनित किया गया है, जिनमें से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब परियोजनाओं का कार्य आवंटित कर दिया गया है। यह निर्णय शुक्रवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई रोप-वे विकास संचालन समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुल 50 रोप-वे परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है, जिनमें से छह परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चयनित किया गया। यह निर्णय न केवल तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन के दीर्घकालिक विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा। बैठक में चयनित छह परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। रुद्रप्रयाग जिले में सोनप्रयाग से केदारनाथ और चमोली जिले में गोविन्दघाट से हेमकुंड साहिब रोप-वे परियोजनाओं का कार्य आवंटित कर दिया गया है। वहीं, नैनीताल जिले में काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर परियोजना अभी अनुमोदन के चरण में है। इसके अतिरिक्त, रुद्रप्रयाग में कनकचौरी से कार्तिक स्वामी रोप-वे परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। उत्तरकाशी जिले में रैथल बारसू से बरनाला और चमोली जिले में जोशीमठ-औली-गौरसों रोप-वे परियोजना के लिए डीपीआर के निविदा प्रक्रिया की कार्यवाही जारी है।मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सोनप्रयाग से केदारनाथ एवं गोविन्दघाट से हेमकुंड साहिब परियोजनाओं के प्रत्येक चरण की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाए और साथ ही पर्ट चार्ट (परियोजना मूल्यांकन एवं समीक्षा तकनीक चार्ट) तैयार कर कार्य की निगरानी की जाए। उन्होंने वन एवं वन्यजीव स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी जोर दिया। रोप-वे निर्माण के लिए भारी मशीनों और उपकरणों को निर्माण स्थल तक पहुंचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण में टर्निंग रेडियस बढ़ाने और पुलों की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए अभी से आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि निर्माण कार्य समय पर और सुरक्षित रूप से पूरा हो सके। काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर रोप-वे परियोजना में कैंचीधाम को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए कैंचीधाम तक रोप-वे की संभावनाओं को गंभीरता से तलाशा जाए। काठगोदाम से हनुमानगढ़ी पहुंचने के बाद नैनीताल–अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंचीधाम हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख स्थल बन चुका है, जहां दूर-दूर से बाबा नीम करोली के आश्रम तक आने वाले भक्त पहुंचते हैं। मुख्य सचिव ने रोप-वे विकास समिति की प्रथम बोर्ड बैठक इस माह के अंत तक अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। इस समिति के लिए सचिव पर्यटन सदस्य सचिव होंगे। उन्होंने कहा कि सभी बड़ी रोप-वे परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद अगले पांच से दस वर्षों में स्थानीय स्तर पर विकसित होने वाले नए पर्यटन स्थलों और मार्गों के विस्तार के लिए अभी से रोडमैप तैयार कर लिया जाए। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा आसान होगी, बल्कि यह पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। आने वाले वर्षों में उत्तराखंड एक प्रमुख पर्यटन और तीर्थाटन केंद्र के रूप में उभरेगा, जहां रोप-वे परियोजनाएं पर्वतीय क्षेत्रों में सतत विकास का आधार बनेंगी।



तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं की यात्रा आसान और सुरक्षित होगी–



उत्तराखंड में हाल ही में प्राथमिकता के आधार पर चुनी गई छह प्रमुख रोप-वे परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाना भी है। इन परियोजनाओं में विशेष रूप से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोप-वे शामिल हैं, जिनका कार्य पहले ही आवंटित कर दिया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में पैदल यात्रा करना लंबे समय और अधिक शारीरिक मेहनत की मांग करता है। रोप-वे परियोजनाओं से श्रद्धालु आसानी से तीर्थस्थलों तक पहुँच सकेंगे, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। विशेषकर बुजुर्ग और शारीरिक रूप से कमजोर लोग अब सुरक्षित और आरामदायक रूप से यात्रा कर पाएंगे। पहाड़ों में अचानक मौसम बदलना आम बात है और कई बार लंबी पैदल यात्रा जोखिमपूर्ण हो जाती है। रोप-वे के माध्यम से हवाई मार्ग से सुरक्षित यात्रा संभव होगी, जिससे दुर्घटना या जोखिम की संभावना काफी कम हो जाएगी। केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर सालाना लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिससे मार्गों पर भारी भीड़ और जाम लग जाता है। रोप-वे के आने से पैदल मार्गों पर भीड़ कम होगी और यात्रा अधिक सुव्यवस्थित ढंग से पूरी होगी।
रोप-वे परियोजनाओं में उच्च तकनीक की केबिन और आधुनिक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। इससे यात्रा अधिक आरामदायक होगी। साथ ही, यह पर्यावरण के अनुकूल तरीका है, क्योंकि भारी वाहन मार्गों पर कम चलेंगे और पहाड़ी क्षेत्रों में प्रदूषण भी कम होगा। रोप-वे से श्रद्धालु ऊंचाई से पर्वतीय दृश्य और घाटियों का मनोरम दृश्य देख पाएंगे। यह यात्रा को केवल तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण अनुभव बना देगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा है कि आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नई पर्यटन और तीर्थस्थलों तक रोप-वे मार्ग का विस्तार किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं के लिए और अधिक स्थानों तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। इन परियोजनाओं के पूरे होने से उत्तराखंड के तीर्थस्थलों में आधुनिक, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का नया युग शुरू होगा। यह कदम न केवल तीर्थयात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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