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October 15, 2026
Daily Lok Manch
राष्ट्रीय

पीएम मोदी ने दिल्ली में लिया ‘भजन क्लबिंग’ का आनंद, खंजरी बजाकर भजनों में हुए शामिल, जानिए जेन-जेड के बीच क्यों बढ़ रहा यह आध्यात्मिक ट्रेंड, वीडियो



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शाम दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर किया गया था। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भजनों की धुन पर खंजरी बजाते और साथ-साथ गुनगुनाते नजर आए। उन्होंने गुजराती और हिंदी भजनों का आनंद लिया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के साथ आध्यात्मिक माहौल का हिस्सा बने।



‘भजन क्लबिंग’ इन दिनों युवाओं, खासकर जेन-जेड के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा एक नया आध्यात्मिक चलन है। इसमें पारंपरिक भजन और कीर्तन को आधुनिक संगीत, रोशनी, ध्वनि व्यवस्था और कॉन्सर्ट जैसे माहौल के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक आध्यात्मिक संगीत को युवाओं की पसंद और आधुनिक जीवनशैली से जोड़ना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी ‘भजन क्लबिंग’ का उल्लेख कर चुके हैं। जुलाई में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में उन्होंने इस नए चलन की चर्चा करते हुए कहा था कि भारत की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और आस्था को आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि भजन क्लबिंग को जेन-जी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है।



इससे पहले जनवरी 2026 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री मोदी ने भजन क्लबिंग का जिक्र किया था। उन्होंने युवाओं के बीच पारंपरिक आध्यात्मिक संगीत के नए रूप में बढ़ती रुचि की सराहना की थी। इसके बाद से भजन क्लबिंग को लेकर युवाओं के बीच चर्चा और बढ़ी है।

जेन-जेड के बीच क्यों लोकप्रिय हो रहा है भजन क्लबिंग

भजन क्लबिंग में भक्ति संगीत को पारंपरिक धार्मिक आयोजन की सीमाओं से बाहर निकालकर युवाओं के अनुकूल माहौल में पेश किया जाता है। यहां भजन और कीर्तन के साथ आधुनिक संगीत संयोजन, रोशनी और सामूहिक गायन का इस्तेमाल किया जाता है। कई कार्यक्रमों में लोग बैठकर भजन सुनने के बजाय संगीत की धुन पर झूमते और साथ गाते दिखाई देते हैं।

इसमें भक्ति और मनोरंजन का एक ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो युवा पीढ़ी को आकर्षित कर रहा है। जेन-जेड के लिए यह आध्यात्मिकता से जुड़ने का एक अलग अनुभव बन रहा है। खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक भजनों की मूल भावना को बनाए रखते हुए उन्हें आधुनिक प्रस्तुति दी जाती है।

भजन क्लबिंग के बढ़ते चलन को भारतीय संगीत और आध्यात्मिक परंपराओं के नए प्रयोग के तौर पर भी देखा जा रहा है। सोशल मीडिया ने भी इसे युवाओं तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। भजन, कीर्तन और आध्यात्मिक संगीत के नए रूपों के वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं। यही वजह है कि भजन क्लबिंग अब केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर युवाओं के बीच एक नए तरह के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव के रूप में पहचान बना रहा है।

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