नई दिल्ली। लोकसभा में पेपरलीक रोकने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर लंबे समय से जारी गतिरोध खत्म होने के आसार बन गए हैं। विपक्ष ने सरकार की ओर से पेश किए गए पेपरलीक बिल पर चर्चा के लिए सहमति जता दी है। इसके बाद सदन में इस विधेयक पर विस्तृत बहस होगी और अंत में वोटिंग कराकर इसे पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
संसदीय सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर गतिरोध समाप्त करने का प्रयास किया। उनकी पहल के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि विधेयक पर लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा कराई जाए, ताकि सभी दल अपनी बात सदन के पटल पर रख सकें। इसके बाद मतदान के जरिए बिल पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
विपक्षी दलों का कहना है कि वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपरलीक पर सख्त कार्रवाई के पक्षधर हैं, लेकिन सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कानून लागू होने के बाद राज्यों और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारियां किस तरह तय होंगी। साथ ही छात्रों के हितों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की व्यवस्था पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह विधेयक देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली पेपरलीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। कानून के तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा, भारी जुर्माना और संगठित अपराध में शामिल गिरोहों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
लोकसभा में होने वाली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्क पेश करेंगे। बहस समाप्त होने के बाद विधेयक पर मतदान कराया जाएगा। यदि बिल लोकसभा से पारित हो जाता है, तो इसे आगे की संसदीय प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर अब सदन की कार्यवाही पर टिकी है, क्योंकि इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

