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October 29, 2026
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अंतरराष्ट्रीय

इजराइल चुनाव में किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू की सत्ता वापसी पर संकट, सरकार गठन में अरब दलों की भूमिका अहम

इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों ने देश की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी गठबंधन सबसे बड़े खेमे के रूप में उभरा है, लेकिन वह सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत हासिल करने से पीछे रह गया है। वहीं, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन भी बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका है। ऐसे में देश में त्रिशंकु संसद की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। अब सरकार गठन की कवायद में अरब राजनीतिक दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

इजराइल की 120 सदस्यीय संसद को क्नेसेट कहा जाता है। यहां किसी भी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। शुरुआती मतगणना के दौरान किसी भी गठबंधन के इस आंकड़े तक नहीं पहुंचने से राजनीतिक दलों के सामने समर्थन जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों पर आगे

इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मतों की गिनती के बाद नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है। उनकी लिकुड पार्टी 26 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में सामने आई है।

हालांकि, सबसे बड़ा दल होने के बावजूद नेतन्याहू के सामने सरकार गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की चुनौती बनी हुई है। उनके गठबंधन को बहुमत के लिए आठ और सीटों की जरूरत है। चुनाव के दौरान सुरक्षा, सरकार की नीतियों और देश के राजनीतिक भविष्य से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।

दूसरी ओर, गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को शुरुआती रुझानों में 48 सीटें मिलने का अनुमान है। आइसेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिलने की संभावना है। विपक्षी खेमे में शामिल अन्य दल भी सरकार बनाने की कोशिश में जुट सकते हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े उसके लिए भी बहुमत हासिल करना आसान नहीं बनाते।

अरब दलों के हाथ में सरकार गठन की चाबी

इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अरब राजनीतिक दलों का प्रदर्शन है। शुरुआती नतीजों में जॉइंट लिस्ट और राआम सहित अरब दलों को कुल 19 सीटें मिलने का अनुमान है। यह प्रदर्शन उन्हें सरकार गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका में ला सकता है।

नेतन्याहू और आइसेनकोट, दोनों के गठबंधन बहुमत से दूर हैं। ऐसे में अरब दलों का समर्थन किसी गठबंधन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, इन दलों के साथ राजनीतिक समझौता करना आसान नहीं होगा। नेतन्याहू पहले ही अरब दलों के साथ सरकार बनाने से इनकार कर चुके हैं। वहीं, विपक्ष के सामने भी अपने सहयोगियों को साथ रखते हुए बहुमत जुटाने की चुनौती है।

प्रमुख दलों की स्थिति

शुरुआती चुनावी आंकड़ों में लिकुड को 26, याशर को 21, बैयाचद को 12, जॉइंट लिस्ट को 11, डेमोक्रेट्स को 8 और राआम को 8 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। इसके अलावा शास, यूनाइटेड टोरा जुडाइज्म, इजराइल बेतेनु और ओत्ज्मा येहुदित जैसे दलों को सात-सात सीटें मिलने की संभावना है। धार्मिक जायोनी पार्टी को छह सीटें मिलने का अनुमान है। अंतिम मतगणना के बाद इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।

आगे क्या होगा?

चुनाव के बाद अब सभी राजनीतिक दलों की नजर गठबंधन बनाने की संभावनाओं पर टिकी है। यदि कोई भी नेता आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल नहीं होता है, तो इजराइल में दोबारा चुनाव कराने की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

फिलहाल चुनाव के नतीजे अंतिम नहीं हैं। शेष मतों की गिनती और आधिकारिक घोषणा के बाद ही संसद में दलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे में आने वाले दिन इजराइल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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