September 10, 2026
Daily Lok Manch
राष्ट्रीय

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत का फोकस: खाद्य, ऊर्जा और सप्लाई चेन सुरक्षा पर ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने की तैयारी

दुनिया में बढ़ते व्यापारिक तनाव और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को आर्थिक सहयोग और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी में है। शनिवार से नई दिल्ली में शुरू होने वाले इस सम्मेलन में भारत वैश्विक दक्षिण की विकास संबंधी प्राथमिकताओं को प्रमुखता से उठाएगा। खास तौर पर खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और मजबूत सप्लाई चेन जैसे मुद्दे भारत के एजेंडे में प्रमुख रहेंगे।

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी की पुष्टि हो चुकी है। करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होगा। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई देशों के शीर्ष नेता बैठक में शामिल होंगे।

भारत के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, नई दिल्ली ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण की विकास संबंधी जरूरतों को आगे बढ़ाने वाले एक महत्वपूर्ण और पूरक मंच के तौर पर मजबूत करना चाहती है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में वैश्विक व्यापार विवादों और भू-राजनीतिक बदलावों ने दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा को लेकर सहयोग बढ़ाना जरूरी है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां

ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी संकट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ते तनाव से प्रभावित है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों ने भी ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। वहीं, अमेरिकी प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों का भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर देखने को मिल रहा है।

सम्मेलन से पहले यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या ब्रिक्स सदस्य देश सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा बयान जारी करने को लेकर सहमति बना पाएंगे। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। चूंकि ब्रिक्स में फैसले आम सहमति के आधार पर लिए जाते हैं, इसलिए साझा रुख तैयार करना एक चुनौती हो सकता है।

लगातार बढ़ रहा है ब्रिक्स का दायरा

ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। बाद में संगठन का विस्तार किया गया और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को समूह में शामिल किया गया। इंडोनेशिया भी ब्रिक्स के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसके अलावा कई देशों को ब्रिक्स के पार्टनर देश का दर्जा दिया गया है। इनमें बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।

भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स के बढ़ते प्रभाव का इस्तेमाल विकासशील देशों की आर्थिक चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने के लिए किया जाए। नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सहयोग की पहले से कहीं अधिक जरूरत है। ऐसे में भारत की प्राथमिकता ब्रिक्स को केवल राजनीतिक समूह के बजाय आर्थिक विकास और वैश्विक दक्षिण के हितों के लिए प्रभावी सहयोगी मंच के रूप में स्थापित करना है।

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