राजधानी देहरादून में बारिश के बीच नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसी, 16 दिन पहले ही शुरू हुआ था यातायात, सीएम धामी ने दिए तत्काल मरम्मत के निर्देश - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
July 28, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

राजधानी देहरादून में बारिश के बीच नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसी, 16 दिन पहले ही शुरू हुआ था यातायात, सीएम धामी ने दिए तत्काल मरम्मत के निर्देश



देहरादून में लगातार हो रही बारिश के बीच सोमवार को प्रेमनगर क्षेत्र की नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने नए पुल की एप्रोच रोड का एक हिस्सा धंस जाने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। एप्रोच रोड में बड़ा गड्ढा बनने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर यातायात अस्थायी रूप से रोक दिया। सूचना मिलते ही अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने और एक घंटे के भीतर यातायात बहाल करने के निर्देश दिए।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार पुल की मुख्य संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार का संरचनात्मक नुकसान नहीं हुआ है। समस्या केवल एप्रोच रोड के एक हिस्से में आई है, जहां लगातार बारिश और पानी के दबाव के कारण भूमि धंस गई। विभाग ने तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कर दिया और सुरक्षा उपायों के साथ यातायात को सुचारु बनाने की प्रक्रिया शुरू की।

नंदा की चौकी पुल देहरादून और विकासनगर क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। यह पुल प्रेमनगर, विकासनगर, पांवटा साहिब और हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों को जोड़ता है। प्रतिदिन हजारों लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। इनमें सरकारी और निजी कर्मचारी, छात्र, व्यापारी तथा स्थानीय निवासी शामिल हैं। ऐसे में पुल की एप्रोच रोड धंसने की खबर सामने आते ही लोगों में चिंता बढ़ गई।

यह पुल हाल ही में लंबे इंतजार के बाद लोगों के लिए खोला गया था। वर्ष 2025 में आई भीषण बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण पुराना पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद यहां नए पुल का निर्माण कराया गया। लगभग 300 दिनों तक चले निर्माण कार्य के बाद 12 जुलाई 2026 को इस पुल पर यातायात शुरू किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि नया पुल लंबे समय तक सुरक्षित और सुचारु यातायात सुनिश्चित करेगा, लेकिन शुरुआत के महज 16 दिन बाद एप्रोच रोड धंसने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुल के निर्माण में आधुनिक तकनीक और करोड़ों रुपये खर्च किए गए हों, उसकी एप्रोच रोड पहली ही बड़ी बारिश में क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मजबूत सुरक्षा उपाय किए गए होते तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।

उधर, प्रशासन और विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस घटना को पुल की विफलता के रूप में देखना उचित नहीं होगा। अधिकारियों के मुताबिक पुल का ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है और यातायात के लिए सक्षम है। केवल एप्रोच रोड का एक हिस्सा धंसा है, जिसकी मरम्मत युद्धस्तर पर की जा रही है।

16 करोड़ की लागत से बना पुल, गुणवत्ता पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार नंदा की चौकी पुल का निर्माण करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। पुल निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की निगरानी में संपन्न कराया गया था। निर्माण के दौरान आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया, जिनमें वेल फाउंडेशन तकनीक, आरसीसी सुरक्षा दीवारें और मजबूत पिलर शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य पुल को बाढ़, तेज बहाव और अन्य प्राकृतिक चुनौतियों से सुरक्षित रखना था।

इसके बावजूद एप्रोच रोड धंसने की घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित होने के बावजूद एप्रोच रोड या उसके आसपास की मिट्टी लगातार वर्षा, जलभराव अथवा कटाव के कारण कमजोर पड़ सकती है। यदि जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित हो जाए या मिट्टी का कटाव अधिक हो तो सड़क का हिस्सा धंस सकता है। विभाग इसी पहलू की तकनीकी जांच भी कर रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़कें और एप्रोच मार्ग प्रभावित हुए हैं। नंदा की चौकी पुल के मामले में भी प्रारंभिक जांच में यही सामने आया है कि अत्यधिक वर्षा के चलते एप्रोच क्षेत्र में मिट्टी का कटाव हुआ, जिससे सड़क का हिस्सा धंस गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुल के पिलर, डेक और अन्य मुख्य संरचनात्मक हिस्से पूरी तरह सुरक्षित हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुल की सुरक्षा और स्थायित्व को लेकर विस्तृत तकनीकी परीक्षण कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। साथ ही बारिश के मौसम को देखते हुए राज्य के अन्य संवेदनशील पुलों और सड़कों का भी निरीक्षण करने को कहा गया है।

उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। वर्ष 2008 में हल्द्वानी की गौला नदी पर बना आरसीसी बाईपास पुल क्षतिग्रस्त हुआ था। वर्ष 2012 में अस्सी गंगा घाटी में कई पुल आपदा की चपेट में आए थे। वहीं वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा में रामबाड़ा पुल समेत राज्यभर में बड़ी संख्या में पुल और सड़कें प्रभावित हुई थीं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उस आपदा में लगभग 147 पुल और 1300 से अधिक सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं।

फिलहाल नंदा की चौकी पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन एप्रोच रोड धंसने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि मरम्मत कार्य के साथ-साथ तकनीकी जांच भी निष्पक्ष तरीके से हो, ताकि भविष्य में इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पर दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलती रहे।

Related posts

इस बार चार धाम यात्रा में हर दिन इतने श्रद्धालु ही कर सकेंगे दर्शन, जारी की गई नई गाइडलाइन

admin

Uttarakhand Badrinath Temple Door Closed : उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद

admin

मुख्यमंत्री धामी ने एमएफएन विश्व चैम्पियन दिगंबर सिंह रावत को दी बधाई, कहा- युवाओं के लिए हैं प्रेरणा

admin

Leave a Comment