H-1B Visa Rules: नौकरी छूटते ही अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है! 5 लाख भारतीयों पर मंडराया बड़ा खतरा - Daily Lok Manch PM Modi USA Visit New York Yoga Day
August 9, 2026
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H-1B Visa Rules: नौकरी छूटते ही अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है! 5 लाख भारतीयों पर मंडराया बड़ा खतरा



अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। अमेरिकी प्रशासन नौकरी छूटने के बाद नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिनों की ग्रेस पीरियड (मोहलत) को खत्म करने पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो H-1B वीजा धारकों के लिए नौकरी जाने के बाद अमेरिका में रुकना और नई नौकरी खोजना काफी मुश्किल हो सकता है।

मौजूदा नियमों के तहत H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी समाप्त होने के बाद 60 दिनों तक अमेरिका में रहने और नई नौकरी तलाशने की अनुमति मिलती है। इस दौरान यदि उन्हें नया नियोक्ता मिल जाता है और वह उनके वीजा का स्पॉन्सर बन जाता है, तो वे बिना देश छोड़े अपनी नौकरी जारी रख सकते हैं। लेकिन प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर यह सुविधा समाप्त हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव को फिलहाल व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है। अभी तक इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और न ही इसे आधिकारिक नियम के रूप में लागू किया गया है। यानी फिलहाल H-1B वीजा धारकों के लिए मौजूदा 60 दिनों का ग्रेस पीरियड पहले की तरह प्रभावी है।

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो नौकरी खत्म होने के तुरंत बाद कर्मचारियों को अमेरिका छोड़ने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में नई नौकरी खोजने, इंटरव्यू देने और वीजा ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। इससे विदेशी पेशेवरों के सामने कानूनी और आर्थिक दोनों तरह की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

इस संभावित बदलाव का सबसे अधिक असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे करीब 5 लाख भारतीय इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिकी टेक कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और अन्य विशेषज्ञ H-1B वीजा के जरिए कार्यरत हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 60 दिन की मोहलत समाप्त होती है, तो कर्मचारियों पर नई नौकरी जल्द से जल्द हासिल करने का दबाव बढ़ जाएगा। साथ ही कंपनियों को भी वीजा ट्रांसफर और भर्ती की प्रक्रिया पहले से अधिक तेजी से पूरी करनी होगी। इसका असर अमेरिकी टेक उद्योग और विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन की मंजूरी के बाद ही लागू होगा। ऐसे में H-1B वीजा धारकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इस प्रस्ताव से जुड़े आगे के घटनाक्रम पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। यदि नियम में बदलाव होता है, तो लाखों विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में रोजगार और निवास से जुड़े नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त हो सकते हैं।

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