Uttarakhand DIPR
Uttarakhand DIPR
October 23, 2026
Daily Lok Manch
उत्तराखंड

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस के दो अहम पद, बढ़ी सियासी हलचल

उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी के दो अहम पदों से से किनारा करने का एलान कर दिया। रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की पेशकश की है। यह फैसला उनके पूर्व ओएसडी और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सामने आया है।

हरीश रावत ने कहा कि उनके सहयोगी से जुड़े आरोपों और जांच के कारण कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने पार्टी की छवि को लेकर चिंता जताते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। रावत ने यह भी कहा कि यदि उनकी वजह से पार्टी को किसी तरह की परेशानी या नुकसान होता है तो वह इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं।

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ED के अनुसार कार्रवाई के दौरान करीब 32 लाख रुपये नकद और कई लग्जरी घड़ियां बरामद की गईं। जीना पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में ओएसडी भी रह चुके हैं और वर्तमान में उनके निजी सहायक के तौर पर काम कर रहे थे।

ED की कार्रवाई के बाद यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में तेजी से चर्चा का विषय बन गया। विपक्षी दलों की ओर से भी कांग्रेस और हरीश रावत को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे समय में जब उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं, रावत का पद छोड़ने का फैसला कांग्रेस के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, हरीश रावत ने अपने सहयोगी पर लगे आरोपों को लेकर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें आरोपों पर विश्वास नहीं है और जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी। रावत ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी स्तर पर उनकी कोई गलती साबित होती है तो उसके लिए उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

हरीश रावत लंबे समय से उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 2014 से 2017 तक रहा। हाल के महीनों में उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाने और अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की बात भी कही थी। इसके बावजूद वह पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

अब उनके इस्तीफे के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व इस फैसले पर क्या रुख अपनाता है और हरीश रावत की आगे की राजनीतिक भूमिका क्या होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं, चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ED की जांच आगे बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

Leave a Comment